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Up Kiran,Digital Desk: बिहार सरकार ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। अब राज्य के सरकारी डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस करने से रोका जाएगा। यह कदम बिहार सरकार के सात निश्चय-तीन योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा को सुलभ और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी, जिससे मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सकेगा।

जमीनी स्तर पर लागू करने की योजना

इस नए निर्णय को लागू करने से पहले, स्वास्थ्य विभाग ने एक छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में डॉक्टरों की उपलब्धता, मरीजों की लंबी प्रतीक्षा, कार्यभार और सेवा गुणवत्ता जैसी समस्याओं का गहन अध्ययन करेगी। समिति अपनी रिपोर्ट के माध्यम से सरकार को निजी प्रैक्टिस पर रोक से जुड़े संभावित असर और समाधान का सुझाव देगी, ताकि इस योजना का सही तरीके से कार्यान्वयन हो सके।

डॉक्टरों को मिलेगी प्रोत्साहन की नई राह

सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि इस निर्णय का डॉक्टरों की आय और मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। इसलिए, सरकार एक नई प्रोत्साहन नीति तैयार करने पर विचार कर रही है, जिसमें डॉक्टरों को अतिरिक्त वेतन, इंसेंटिव, पदोन्नति में वरीयता, और बेहतर कार्य परिस्थितियों के रूप में सुविधाएं दी जा सकती हैं। खासकर उन डॉक्टरों के लिए जो ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, उनके लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज का प्रस्ताव भी तैयार किया जा सकता है।