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Up kiran,Digital Desk : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने जो प्रतिशोध लिया, उसने दुश्मन देश पाकिस्तान की रूह कंपा दी थी। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मैदान-ए-जंग में मौजूद रहे मेजर आइम्सन इन्पियु ने पहली बार उन खौफनाक पलों और भारतीय सेना के पराक्रम की अनसुनी कहानी साझा की है। मेजर के मुताबिक, भारत की जवाबी कार्रवाई इतनी भीषण थी कि पाकिस्तानी सेना पूरी तरह बैकफुट पर आ गई थी और अंत में उसने खुद संघर्षविराम (सीजफायर) की गुहार लगाई थी।

लॉन्चपैड्स पर पहली स्ट्राइक: जब थर्रा उठी एलओसी

ऑपरेशन सिंदूर के समय एलओसी (LoC) पर कंपनी कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रहे मेजर इन्पियु ने बताया कि मिशन की शुरुआत दुश्मनों के उन लॉन्चपैड्स को तबाह करने से हुई, जहां से आतंकी घुसपैठ की फिराक में थे। मेजर ने कहा, "हमें पता था कि हमारी स्ट्राइक के बाद दुश्मन जवाबी हमला करेगा। हम पूरी तरह तैयार थे कि किस हथियार का इस्तेमाल करना है, किस बंकर में पोजिशन लेनी है। जब हमारी पहली स्ट्राइक हुई, तो पाकिस्तान लंबे समय तक सन्न रह गया और जवाब देने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।"

महज 70 मीटर की दूरी पर था दुश्मन: 'मारो या मर जाओ'

रणभूमि के हालात बयां करते हुए मेजर ने बताया कि कुछ जगहों पर पाकिस्तानी सैनिक भारतीय चौकियों से महज 70 मीटर की दूरी पर थे। मेजर ने कहा, "मैं खुद 1500 मीटर की दूरी से मोर्चा संभाले हुए था। जंग का सीधा उसूल था—अगर आपने उसे नहीं मारा, तो वो आपको मार देगा। अगर आप डर गए, तो सब खत्म है। हमने ठान लिया था कि जितना मौका मिले, उतना मारो। हमने अपने हर हथियार का परीक्षण उन पर कर डाला।"

बैकफुट पर पाकिस्तान: नौसेना भी करने वाली थी 'फाइनल प्रहार'

मेजर इन्पियु के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना शुरुआत में तो मोर्टार और एलएमजी से गोलियां बरसा रही थी, लेकिन जब भारतीय इन्फैंट्री ने अपना रौद्र रूप दिखाया, तो उनकी हिम्मत जवाब दे गई।

नौसेना का दबाव: हाल ही में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने भी खुलासा किया था कि भारतीय नौसेना समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर कुछ ही मिनटों में हमला करने वाली थी।

सीजफायर की गुहार: चारों तरफ से घिरने और भारी नुकसान झेलने के बाद, 10 मई को पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया, जिसके बाद सीजफायर लागू हुआ।

इंसानियत और शौर्य की मिसाल

पहलगाम हमले की बरसी पर जहां सेना के इस पराक्रम को याद किया जा रहा है, वहीं स्थानीय शहीद आदिल हुसैन जैसे वीरों की कहानी भी गूंज रही है। मेजर ने साफ किया कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक जवाबी हमला नहीं था, बल्कि उन आतंकियों और उनके आकाओं को दिया गया एक कड़ा सबक था जो भारत की शांति भंग करने का सपना देखते हैं।