Up Kiran, Digital Desk: हर व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपना घर खरीदे, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि घर खरीदने से पहले वास्तु शास्त्र के महत्व को समझना कितना जरूरी है? आजकल, जब हम घर के बजट, लोकेशन और सुविधाओं पर विचार करते हैं, तो अक्सर वास्तु के बारे में नहीं सोचते। हालांकि, यह एक ऐसा पहलू है जो हमारे घर की ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि से जुड़ा हुआ है। अगर आप 2026 में नया घर लेने की योजना बना रहे हैं, तो वास्तु के इन कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखना आपके घर को बेहतर बना सकता है।
मुख्य द्वार का सही दिशा में होना है बेहद अहम
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार सबसे अहम होता है, क्योंकि यहीं से घर में ऊर्जा का प्रवेश होता है। इस वजह से नए घर का चयन करते वक्त मुख्य द्वार की दिशा का ध्यान रखना जरूरी है। आदर्श रूप से, घर के मुख्य द्वार का उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए, क्योंकि इन दिशाओं को सकारात्मक ऊर्जा और देवताओं का स्थान माना जाता है। इसके विपरीत, दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार होने से घर में नकारात्मकता और संघर्ष का आभास हो सकता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि मुख्य द्वार के सामने कोई खंभा या पेड़ न हो, क्योंकि इससे घर में ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो सकता है।
रसोई का स्थान और इसका महत्व
किसी भी घर की रसोई का स्थान बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह न केवल परिवार के स्वास्थ्य, बल्कि आर्थिक स्थिति से भी जुड़ा है। वास्तु शास्त्र में रसोई का स्थान अग्नि तत्व से संबंधित है, और यह घर की शांति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। रसोई को घर के दक्षिण-पूर्व कोण (अग्नि कोण) में बनवाना सबसे उपयुक्त माना जाता है। अगर यह संभव नहीं हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा भी एक अच्छा विकल्प है। वहीं, रसोई को कभी भी उत्तर-पूर्व दिशा में न बनवाएं, क्योंकि इससे परिवार में कलह और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, यह ध्यान रखें कि रसोई और बाथरूम का दरवाजा एक-दूसरे के सामने न हो, क्योंकि इससे घर में नकारात्मकता का संचार हो सकता है।
घर के केंद्र को बनाएं साफ और खाली
घर का केंद्र बिंदु यानी 'ब्रह्मस्थान' एक बहुत ही संवेदनशील स्थान होता है। वास्तु के अनुसार, इस हिस्से में ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है, और इसे हमेशा साफ, खाली और हवादार रखना चाहिए। पुराने समय में आंगन को इसी उद्देश्य से घर के मध्य में रखा जाता था, ताकि घर की ऊर्जा का प्रवाह सही तरीके से हो सके। ब्रह्मस्थान पर कभी भी कोई भारी संरचना, पिलर या सीढ़ियां न बनवाएं। यहां पर शौचालय या गहरे गड्ढे का होना घर में सुख और शांति के लिए एक बड़ी बाधा बन सकता है।
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