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Up Kiran,Digital Desk : पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के मामले सामने आने के बाद पूरे देश में एक नई स्वास्थ्य चुनौती उत्पन्न हो गई है। हाल ही में राज्य में इस वायरस के 5 नए मामलों की पुष्टि हुई, जिसके बाद प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों ने अपनी सतर्कता को बढ़ा दिया है। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगभग 100 लोगों को क्वारंटाइन में रखा गया है, इनमें कई अस्पताल के कर्मचारी जैसे डॉक्टर और नर्स भी शामिल हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पतालों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।

वायरस के खतरे की गहराई
निपाह वायरस स्वास्थ्य के लिए कितना घातक हो सकता है, यह न केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि पूरे भारत के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति को शुरुआती लक्षणों में हल्का बुखार, सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याएं होती हैं। जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ती है, गले में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, और चक्कर आने जैसे लक्षण भी उत्पन्न होते हैं। अगर समय रहते इलाज न मिले तो यह वायरस मस्तिष्क पर भी असर डाल सकता है और मरीज को दौरे या भ्रम का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

कैसे फैलता है निपाह वायरस?
निपाह वायरस की पहचान सबसे पहले 1999 में मलेशिया में हुई थी। इसके फैलने का मुख्य कारण फल खाने वाले चमगादड़ों को माना गया है। यह वायरस इंसान से इंसान में भी फैल सकता है, खासकर दूषित खाद्य पदार्थों या सीधे संपर्क से। इस वायरस के लिए फिलहाल कोई विशिष्ट इलाज या स्वीकृत टीका नहीं है, जो इसे और भी खतरनाक बनाता है। कोरोना वायरस की तरह, यह वायरस भी चमगादड़ों से इंसानों में फैलने की संभावना रखता है, जो पहले से ही वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बन चुका है।