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Up kiran,Digital Desk :गणतंत्र दिवस के अवसर पर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ में केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अवैध रूप से घुसपैठ करने वाले विदेशियों की पहचान कर उन्हें वोटर लिस्ट से हटाना सही कदम है, लेकिन इसके लिए पूरे देश को संदेह के घेरे में डाल देना उचित नहीं है। मायावती का कहना है कि इस प्रक्रिया में करीब 100 करोड़ भारतीयों को दस्तावेजी जंजाल में फंसा दिया गया है, जिस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

रुपये की गिरती कीमत पर उठाए सवाल
मायावती ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए रुपये की गिरती कीमत पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और ऐसे समय में यह सवाल जरूरी है कि भारत की आर्थिक स्थिति कितनी स्थिर और मजबूत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या रुपया एक डॉलर के मुकाबले 100 के आंकड़े पर पहुंचकर ही रुकेगा।

वैश्विक हालात में लोकतंत्र और संविधान की अहमियत
बसपा प्रमुख ने कहा कि केवल पड़ोसी देशों में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में जिस तेजी से परिस्थितियां बदल रही हैं, ऐसे में भारतीय लोकतंत्र और संविधान का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि वह देश को आत्मनिर्भर बनाने और आम लोगों की उम्मीदों को मजबूत करने के लिए ठोस और सार्थक प्रयास करती रहे।

धर्म परिवर्तन और विभाजनकारी राजनीति पर टिप्पणी
मायावती ने धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कड़े कानून और तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद यदि यह समस्या थम नहीं रही है, तो इसकी जड़ में जाकर मूल कारणों की पहचान करना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि धर्म परिवर्तन की आड़ में होने वाली विभाजनकारी राजनीति और हिंसा पर जितनी जल्दी रोक लगे, उतना ही देशहित में बेहतर होगा।

महंगाई और बेरोजगारी को लेकर बसपा की चिंता
अपने बयान में मायावती ने देश में बढ़ती महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जातिवाद और सांप्रदायिकता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन कारणों से बहुजन समाज के लोगों के बीच सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक असमानता लगातार बढ़ रही है। जीवन स्तर में गिरावट और भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता बसपा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।