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Delhi CM: दिल्ली की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ है जब रेखा गुप्ता ने CM पद की शपथ ली। ये ऐतिहासिक पल न केवल उनके लिए बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वो पहली बार विधायक बनी हैं और अब दिल्ली की CM हैं। हालांकि, इस उपलब्धि के साथ ही उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि उनके पास वो विशेष अधिकार नहीं होंगे जो अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के पास होते हैं।

राजधानी दिल्ली को आंशिक राज्य का दर्जा प्राप्त है। ये भारत की राजधानी होने के नाते एक केंद्र शासित प्रदेश है। इसका प्रशासन संविधान के अनुच्छेद 239AA के तहत चलता है, जो दिल्ली को विधानसभा का अधिकार तो देता है, मगर कई प्रमुख शक्तियां केंद्र सरकार के पास ही रखता है। यही कारण है कि दिल्ली के CM के पास कुछ प्रमुख शक्तियों का अभाव है।

पुलिस पर नियंत्रण का अभाव

दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन है। इसका मतलब है कि CM को कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में कोई अधिकार नहीं है। यदि दिल्ली में कोई दंगा या कानून व्यवस्था की समस्या पैदा होती है। तो CM पुलिस को सीधे आदेश नहीं दे सकते।

भूमि पर नियंत्रण नहीं

दिल्ली में भूमि से जुड़े सभी मामले केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अधीन हैं। इसका अर्थ है कि रेखा गुप्ता रियल एस्टेट या सरकारी जमीन पर सीधे फैसले नहीं ले सकतीं।

कानून व्यवस्था पर अधिकार न होना

दिल्ली में कानून व्यवस्था बनाए रखना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। CM किसी भी सुरक्षा बलों को तैनात करने या हटाने का निर्णय नहीं ले सकतीं, जिससे उनकी कार्यक्षमता पर असर पड़ता है।

नगर निगम पर सीमित नियंत्रण

दिल्ली नगर निगम (MCD) एक अलग इकाई के रूप में काम करता है और केंद्र सरकार के अधीन आता है। इसलिए दिल्ली सरकार का नगर निगम सेवाओं जैसे सफाई और सड़क मरम्मत पर सीमित प्रभाव है।

राज्यपाल की मंजूरी की अनिवार्यता

दिल्ली में उपराज्यपाल (LG) की भूमिका बहुत अहम है। दिल्ली सरकार द्वारा बनाए गए कई कानूनों और नीतियों को लागू करने से पहले LG की मंजूरी जरूरी होती है। और तो और LG के पास कुछ मामलों में वीटो पावर भी होती है, जिससे वो फैसले को केंद्र सरकार के पास भेज सकते हैं।