Up Kiran,Digital Desk: महाराष्ट्र के मीरा भायंदर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी की पार्षद डिंपल मेहता नई महापौर चुनी गई हैं। उनके चुनाव का महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) और महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमईएस) ने कड़ा विरोध जताया है। ये पार्टियां मांग कर रही हैं कि महापौर के पद पर केवल मराठी भाषी नेता को ही नियुक्त किया जाना चाहिए। मीरा भायंदर नगर निगम में 95 पार्षद हैं। इनमें भाजपा की 78 निर्वाचित सीटों के साथ मजबूत स्थिति है। कांग्रेस के 13 पार्षद हैं, शिवसेना (शिंदे गुट) के 3 पार्षद हैं और भाजपा के एक बागी उम्मीदवार ने भी जीत हासिल की है। गौरतलब है कि बागी पार्षद अनिल पाटिल ने भी भाजपा को अपना समर्थन दिया है।
भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ विपक्षी मोर्चा गठित हुआ
कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे गुट) ने महापौर चुनाव में भाजपा की ताकत को चुनौती देने के लिए एक संयुक्त मोर्चा बनाया था। भाजपा ने वरिष्ठ नेता नरेंद्र मेहता की भाभी डिंपल मेहता को अपना उम्मीदवार बनाया था। वहीं, कांग्रेस-शिवसेना गठबंधन ने रुबीना खातून को महापौर पद के लिए अपना उम्मीदवार नामित किया था।
मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद ने राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है।
गैर-मराठी मेयर के चयन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र एकीकरण समिति ने घोषणा की है कि वह आज डिंपल मेहता की नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन करेगी और तीन किलोमीटर लंबी सड़क पदयात्रा निकालेगी। समिति का तर्क है कि शहर की बहुसंख्यक आबादी की भावना का प्रतिनिधित्व करने के लिए मेयर का मराठी भाषी होना आवश्यक है। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि प्रदर्शनकारी समूहों में शिवसेना और एमएनएस के सदस्य भी शामिल हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि यह आपत्ति भाषाई गौरव से संबंधित नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जुड़ी है।
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