क्या आपने कभी सोचा है कि हमारा दिमाग दिनभर में बनने वाले जहरीले कचरे को कैसे साफ करता है? वैज्ञानिकों ने एक स्टडी में पाया है कि दिमाग की इसी 'कचरा-सफाई' प्रणाली में अगर कोई दिक्कत आ जाए, तो यह डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। यह स्टडी उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो खराब नींद लेते हैं या जिन्हें दिल से जुड़ी बीमारियां हैं।
क्या है दिमाग की यह 'सफाई' प्रणाली?
हमारे दिमाग में एक खास तरह का तरल पदार्थ होता है, जिसे 'सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड' (cerebrospinal fluid) कहते हैं। यह न सिर्फ हमारे दिमाग को चोट लगने से बचाता है, बल्कि पोषक तत्व भी पहुंचाता है। इसका सबसे जरूरी काम दिमाग में जमा होने वाले जहरीले प्रोटीन (जैसे कि एमाइलॉइड) और दूसरे कचरे को बाहर निकालना है। इस पूरी सफाई प्रक्रिया को 'ग्लाम्फैटिक सिस्टम' (glymphatic system) कहा जाता है।
जब हम गहरी नींद में होते हैं, तब यह सिस्टम सबसे अच्छे तरीके से काम करता है।
नींद और दिल की बीमारी का कनेक्शन
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 40,000 वयस्कों के ब्रेन स्कैन का अध्ययन किया और पाया कि जिन लोगों की नींद खराब रहती है या जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर जैसी दिल की समस्याएं हैं, उनके दिमाग में यह सफाई ठीक से नहीं हो पाती। तरल पदार्थ का बहाव धीमा हो जाता है, जिससे जहरीले प्रोटीन दिमाग में ही जमा होने लगते हैं। यही प्रोटीन आगे चलकर 'अल्जाइमर' और अन्य तरह के डिमेंशिया का कारण बनते हैं।
डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान की याददाश्त, सोचने-समझने की शक्ति और बोलने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता: इस स्टडी से जुड़े लेखक यूटोंग चेन का कहना है, “हमारे काम ने यह साबित किया है कि ग्लाम्फैटिक सिस्टम में किसी भी तरह की रुकावट डिमेंशिया में एक बड़ी भूमिका निभाती है। यह हमारे लिए एक रोमांचक खोज है क्योंकि अब हम यह पता लगा सकते हैं कि इस सिस्टम को बेहतर कैसे बनाया जाए।”
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