Up kiran,Digital Desk : चुनाव आयोग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में साफ कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराना उसके अधिकार क्षेत्र में आता है और यह उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। आयोग ने जोर देकर कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी विदेशी नागरिक मतदाता सूची में शामिल न हो। आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह पक्ष रखा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ उन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई कर रही है, जिनमें बिहार सहित कई राज्यों में एसआईआर कराने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों की सीमा, नागरिकता और मतदान के अधिकार से जुड़े संवैधानिक सवाल उठाए गए हैं।
वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि संविधान के अनुसार राज्य के तीनों अंगों में बैठे सभी प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारियों का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 124(3) का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकता संविधान की मूल शर्तों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष संवैधानिक पदों पर नियुक्ति तभी संभव है, जब व्यक्ति भारतीय नागरिक हो। द्विवेदी के मुताबिक, संविधान की पूरी संरचना नागरिक-केंद्रित है और इसी भावना के तहत मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना भी जरूरी हो जाता है।
संविधान की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जब संविधान में ‘नागरिक’ शब्द का प्रयोग किया गया है, तो उसकी जांच किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा होना स्वाभाविक है। चुनाव आयोग का यह दायित्व है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह से विदेशी नागरिक शामिल न हों।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का काम राजनीतिक दलों की बयानबाजी का जवाब देना नहीं है। आयोग का फोकस केवल इस बात पर है कि मतदाता सूची सही और भरोसेमंद बनी रहे। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि कौन क्या कह रहा है, बल्कि यह है कि आयोग के पास यह जिम्मेदारी निभाने की शक्ति और क्षमता है या नहीं।
अपनी दलील को आगे बढ़ाते हुए द्विवेदी ने एक अहम संवैधानिक प्रश्न उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या संविधान का अनुच्छेद 324, जो चुनाव आयोग को चुनावों के संचालन, दिशा और नियंत्रण की शक्ति देता है, किसी कानून के कारण पूरी तरह निष्क्रिय हो सकता है या हर मामले को अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 के साथ पढ़ने पर यह नहीं कहा जा सकता कि मतदाता सूची के संशोधन के मामलों में चुनाव आयोग के अधिकार समाप्त हो जाते हैं। उनके मुताबिक, यह क्षेत्र पूरी तरह बंद नहीं है और मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार बरकरार रहते हैं।




