UP Kiran,Digital Desk: भारत आजकल अपनी रक्षा प्रणाली को न केवल मजबूत बल्कि उन्नत भी बना रहा है। देश के भीतर विकसित हो रहे नए और शक्तिशाली हथियारों की तकनीक भविष्य के युद्ध के लिए तैयार की जा रही है, जो देश की सामरिक स्थिति को और भी प्रबल बनाएंगे। ये उन्नत प्रणालियाँ और परियोजनाएँ न केवल भारत की सैन्य ताकत को दुरुस्त करेंगी, बल्कि एशिया में सामरिक संतुलन को भी नया रूप दे सकती हैं। यहां कुछ प्रमुख विकास योजनाओं पर एक नज़र डालते हैं:
1. BrahMos-NG: भविष्य की मिसाइल प्रणाली
भारत की ब्रह्मोस-एनजी (नेक्स्ट जनरेशन) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का नया संस्करण उन्नत और अधिक प्रभावी होने वाला है। इस मिसाइल को हल्का और कॉम्पैक्ट बनाकर लड़ाकू विमानों, जहाजों और पनडुब्बियों पर तैनात किया जा सकेगा। इसके सटीक लक्ष्य निर्धारण और तेज़ गति से यह दुश्मन के लिए एक चुनौती साबित होगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह ब्रह्मोस का नया संस्करण भारत की मिसाइल रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
2. BrahMos-II: हाइपरसोनिक तकनीक की ओर कदम
भारत ब्रह्मोस-2 के रूप में एक और बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। इस परियोजना में हाइपरसोनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका उद्देश्य एक ऐसी मिसाइल बनाना है जो ध्वनि की गति से भी कई गुना तेज उड़ान भर सके। इसकी अत्यधिक गति के कारण इसे न केवल ट्रैक करना बल्कि उसे रोकना भी मुश्किल होगा। इससे भारत का स्थान हाइपरसोनिक हथियारों की दौड़ में अग्रणी देशों में हो सकता है, जो भविष्य में रक्षा नीति में अहम बदलाव लाएगा।
3. AMCA: स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर जेट
एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) भारत का स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर जेट है, जिसे कई आधुनिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है। इसमें स्टेल्थ तकनीक, अत्याधुनिक एवियोनिक्स और मल्टी-रोल क्षमताएँ शामिल होंगी। इस विमान का भारतीय वायुसेना में समावेश देश की वायु रक्षा प्रणाली को एक नया आयाम देगा, और खासतौर पर लंबी दूरी के मिशनों में इसके फायदे दिखेंगे। यह विमान देश की एयर पावर में एक नई ताकत का रूप धारण करेगा।
4. HAL Tejas Mark 2: नई पीढ़ी का लड़ाकू विमान
तेजस मार्क-2, तेजस का नया और उन्नत संस्करण है, जो वायुसेना के लिए बहुत अहम हो सकता है। इसमें बेहतर इंजन, अत्याधुनिक रडार और नवीनतम हथियार प्रणालियाँ शामिल की जा रही हैं। तेजस मार्क-2 को वायुसेना की विशिष्ट जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया जा रहा है, और यह आने वाले वर्षों में पुराने विमानों की जगह ले सकता है। इसकी क्षमता और प्रदर्शन भारतीय वायुसेना की ताकत को कई स्तरों पर बढ़ाने का काम करेगी।
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