Up Kiran, Digital Desk: दुनिया की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया है. मध्य एशिया के बड़े मुस्लिम देश कजाकिस्तान ने अब्राहम समझौते (Abraham Accords) में शामिल होने का ऐलान कर दिया है यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और मुस्लिम देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने के लिए बनाया गया था.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस खबर की घोषणा की, जिसे उनकी एक और बड़ी विदेश नीति की सफलता के तौर पर देखा जा रहा है.
यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि गाजा में हुए संघर्ष के बाद यह पहला मौका है जब कोई मुस्लिम देश इस तरह खुलकर इजरायल के साथ आ रहा है. ट्रंप ने इसे दुनिया भर में शांति के पुल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है.
यह समझौता प्रतीकात्मक, लेकिन मायने बहुत बड़े
दिलचस्प बात यह है कि कजाकिस्तान और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध पहले से ही हैं. दोनों देशों के बीच 1992 से रिश्ते कायम हैं. तो फिर इस समझौते में शामिल होने का क्या मतलब है? दरअसल, यह कदम प्रतीकात्मक रूप से बहुत बड़ा संदेश देता है.
अब्राहम समझौते को नई जान: गाजा संघर्ष के बाद ऐसा लग रहा था कि यह समझौता ठंडे बस्ते में चला गया है. कजाकिस्तान के जुड़ने से इसमें एक नई जान आई है.
अमेरिका समर्थित गुट में शामिल: इस समझौते में शामिल होकर कजाकिस्तान ने खुद को अमेरिका समर्थित उस गुट के साथ खड़ा कर लिया है, जो इस क्षेत्र में आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा दे रहा है.
चीन और रूस को संदेश: मध्य एशिया में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव के बीच कजाकिस्तान का अमेरिका के करीब आना एक बड़ा भू-राजनीतिक संकेत है.
कजाकिस्तान सरकार ने अपने बयान में कहा है कि यह फैसला उनकी विदेश नीति का "स्वाभाविक और तार्किक विस्तार" है, जो बातचीत और आपसी सम्मान पर आधारित है.
कैसे बनी बात?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव के साथ फोन पर बात करने के बाद यह ऐलान किया. जल्द ही वॉशिंगटन में इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए एक औपचारिक समारोह भी आयोजित किया जाएगा.
क्या है अब्राहम समझौता?
अब्राहम समझौते की शुरुआत 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुई थी. इसका नाम यहूदी, ईसाई और इस्लाम, तीनों धर्मों के पैगंबर 'अब्राहम' के नाम पर रखा गया है, ताकि इन धर्मों को मानने वाले देशों को एक साथ लाया जा सके. इस समझौते के तहत सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने इजरायल के साथ अपने रिश्ते सामान्य किए थे, जिसके बाद मोरक्को भी इसमें शामिल हो गया था.
कजाकिस्तान का यह कदम अब सऊदी अरब जैसे दूसरे बड़े मुस्लिम देशों पर भी इस समझौते में शामिल होने के लिए दबाव बना सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में मिडिल ईस्ट और मध्य एशिया की राजनीति किस करवट बैठती है.

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