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Up Kiran, Digital Desk: जनवरी 2026 में यूरोप और वैश्विक राजनीति में कई ऐसे बदलाव देखने को मिल रहे हैं जिनका असर आम लोगों से लेकर अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक महसूस किया जा रहा है। यूक्रेन युद्ध की छाया अभी बनी हुई है, वहीं अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड को लेकर नया तनाव उभरता दिख रहा है। इसी बीच जर्मनी ने अपने सैन्य दृष्टिकोण में ऐतिहासिक बदलाव का ऐलान किया है।

जर्मनी की सेना में युवाओं की भागीदारी

साल की शुरुआत से ही जर्मनी में 18 साल के युवाओं को सेना में सेवा के लिए अपनी फिटनेस रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नया कदम पिछले महीने पारित कानून के तहत उठाया गया है। फिलहाल भर्ती स्वैच्छिक है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सरकार अनिवार्य सेवा लागू कर सकती है। इसका लक्ष्य स्पष्ट है- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार यूरोप की सबसे मजबूत पारंपरिक सेना तैयार करना।

जर्मन सरकार युवाओं को आकर्षित करने के लिए 23 महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर आकर्षक पैकेज दे रही है। इसमें लगभग 2,600 यूरो मासिक वेतन, मुफ्त आवास और स्वास्थ्य बीमा शामिल है। कर-कटौती के बाद लगभग 2,300 यूरो युवाओं के हाथ में रहेंगे। यह सेवा भविष्य में स्थायी पेशेवर सैन्य नौकरी में बदलने का अवसर भी देती है।

यूरोप-ग्रीनलैंड संकट और आर्थिक दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड खरीदने की पुरानी योजना को फिर से सक्रिय किया। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के असहमति जताने के बाद अमेरिका ने 17 जनवरी को आठ यूरोपीय देशों पर 10% आयात शुल्क लगाने की घोषणा की। यह टैरिफ 1 फरवरी 2026 से लागू हो सकता है। अमेरिका ग्रीनलैंड को आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक आधार के रूप में देखता है, जबकि यूरोप इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है।