UP Kiran,Digital Desk: बांग्लादेश मंगलवार को एक ऐतिहासिक राजनीतिक पल का साक्षी बनने जा रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान, जिन्होंने हाल के आम चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की थी, अब प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। पार्टी के सांसदों ने उन्हें संसदीय दल का नेता चुन लिया है। इस शपथ ग्रहण के साथ ही देश में कई सालों से रुकी हुई राजनीतिक गतिरोध समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है।
नए मंत्रीमंडल में अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व
रहमान की नई सरकार में बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें अल्पसंख्यक समुदायों को भी प्रतिनिधित्व मिला है। मंगलवार को शपथ लेने वाले मंत्रीमंडल में दो प्रमुख अल्पसंख्यक नेताओं का नाम सामने आया है—निताई रॉय चौधरी और दीपेन दीवान। यह संकेत करता है कि बांग्लादेश की राजनीति में समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ लाने का प्रयास हो रहा है।
निताई रॉय चौधरी: अनुभवी नेता का योगदान
निताई रॉय चौधरी, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता हैं, का राजनीतिक अनुभव किसी से कम नहीं। पेशे से वकील और लंबे समय तक संसद सदस्य रहे चौधरी, बांग्लादेश के युवा और खेल मंत्री के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं। उनकी नियुक्ति से यह साफ़ होता है कि पार्टी अपने अनुभवी और रणनीतिक नेताओं के जरिए अपनी नई सरकार को स्थिरता देना चाहती है।
तारिक रहमान की कैबिनेट में प्रमुख नाम
तारिक रहमान के साथ सत्ता में आ रहे अन्य नेताओं में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खसरू महमूद चौधरी, सलाहुद्दीन अहमद और इकबाल हसन महमूद जैसे नेताओं के नाम प्रमुख हैं। ये नाम बांग्लादेश के भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
एक नया दौर: 35 साल बाद पुरुष प्रधानमंत्री
यह शपथ ग्रहण समारोह बांग्लादेश के लिए कई मायनों में खास है। करीब 35 वर्षों बाद बांग्लादेश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिलेगा। इस तथ्य से भी यह नई सरकार महत्वपूर्ण बन जाती है कि BNP लगभग दो दशकों बाद सत्ता में लौट रही है। इसके पहले, BNP ने 2001 से 2006 तक जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन किया था।



_1408935244_100x75.png)
_1496622266_100x75.png)