Up Kiran, Digital Desk: घी भारतीय रसोई का अहम हिस्सा माना जाता है लेकिन बाजार में बिकने वाला हर घी भरोसे के लायक नहीं होता। दिखने और स्वाद में ठीक लगने वाला नकली घी धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक मिलावटी घी का सेवन गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है।
किन चीजों से तैयार होता है नकली घी
जांच में सामने आया है कि मिलावटी घी में अक्सर वनस्पति घी, पाम ऑयल या रिफाइंड तेल मिलाया जाता है। इसके साथ कृत्रिम खुशबू और रंग भी डाले जाते हैं। ऐसे तत्व शरीर में ट्रांस फैट बढ़ाते हैं जो अंदरूनी अंगों के लिए खतरनाक माने जाते हैं।
शरीर पर पड़ने वाले गंभीर असर
लिवर पर दबाव बढ़ता है
ट्रांस फैट लिवर में चर्बी जमा करता है जिससे फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। लगातार सेवन से लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
दिल और दिमाग को खतरा
नकली घी से खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। इससे नसों में रुकावट आ सकती है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है।
डायबिटीज और ब्लड प्रेशर का खतरा
यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ा सकता है। नतीजतन हाई ब्लड प्रेशर और टाइप टू डायबिटीज की आशंका रहती है।
पाचन और इम्युनिटी कमजोर
गैस एसिडिटी और अपच जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं। आंतों की सेहत बिगड़ती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है।
घर पर ऐसे पहचानें शुद्ध घी
खुशबू से पहचान
असली घी में प्राकृतिक सुगंध होती है जबकि नकली में केमिकल जैसी गंध आती है।
ठंड में जमने का तरीका
शुद्ध घी ठंड में एकसमान जमता है।
हथेली पर टेस्ट
हथेली पर रखने पर असली घी धीरे पिघलता है।
आयोडीन जांच
अगर रंग नीला पड़े तो मिलावट की संभावना मानी जाती है।




