Up kiran,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब उस मुकाम पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी की राह मुश्किल नजर आ रही है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'पाषाण युग' में भेजने का संकल्प दोहराया है, तो दूसरी ओर ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति और गुप्त ठिकानों का हवाला देकर अमेरिका को अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। इसी बीच, तेहरान पर हुए ताज़ा हमलों ने ईरानी नेतृत्व को गहरा जख्म दिया है।
ईरान की 'कब्रिस्तान' वाली धमकी: मेजर जनरल हतामी का बयान
ईरानी सेना के प्रमुख मेजर जनरल अमीर हतामी ने एक बेहद उग्र बयान जारी कर अमेरिकी जमीनी हमले की संभावनाओं पर पानी फेरने की कोशिश की है। उन्होंने कहा:
"अगर अमेरिकी सेना ने ईरान की पवित्र धरती पर कदम रखने की जुर्रत की, तो हमलावरों में से एक भी शख्स जिंदा वापस नहीं बचेगा। उन्हें अपनी लाशें ले जाने का मौका भी नहीं मिलेगा। यह मुमकिन नहीं है कि दुनिया सुरक्षित रहे और हमारे लोग असुरक्षित।"
तेहरान में कोहराम: पूर्व विदेश मंत्री घायल, पत्नी की मौत
ईरान की राजधानी तेहरान में हुए एक भीषण हवाई हमले में देश के वरिष्ठ राजनयिक और पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
बड़ी क्षति: इस हमले में खराजी की पत्नी की मौत हो गई है।
महत्व: कमाल खराजी वही शख्स हैं जिन्होंने 2022 में दावा किया था कि ईरान के पास परमाणु बम बनाने की तकनीकी क्षमता है। इस हमले को ईरान के 'न्यूक्लियर माइंडसेट' पर सीधे प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।
"असली ठिकाने तो अभी सुरक्षित हैं"— ईरानी सेना का दावा
अमेरिकी दावों के विपरीत कि ईरान की सैन्य क्षमता नष्ट हो चुकी है, ईरानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोलफाघरी ने एक चौंकाने वाला दावा किया:
गुप्त भंडार: जोलफाघरी ने कहा कि ईरान के पास हथियारों और गोला-बारूद का ऐसा 'गुप्त खजाना' है जिसके बारे में अमेरिका और इजरायल को भनक तक नहीं है।
मामूली नुकसान: उन्होंने कहा कि अमेरिका जिन ठिकानों को तबाह करने का जश्न मना रहा है, वे केवल सतही थे। असली रणनीतिक ठिकाने अभी भी सुरक्षित और सक्रिय हैं।
ट्रंप की भाषा पर अंतरराष्ट्रीय आक्रोश: आयरलैंड ने घेरा
राष्ट्रपति ट्रंप के "ईरान को पत्थर युग में भेज देंगे" वाले बयान की वैश्विक स्तर पर निंदा शुरू हो गई है।
आयरलैंड के पीएम का रुख: प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन ने ट्रंप की भाषा को 'अत्यंत उग्र और अमानवीय' बताया।
मानवीय चिंता: मार्टिन ने कहा कि भले ही ईरान की हुकूमत दमनकारी हो, लेकिन युद्ध की कीमत उन मासूम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है जिनका सत्ता से कोई लेना-देना नहीं है।
युद्ध का वर्तमान स्टेटस: 72 घंटे का अल्टीमेटम?
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 72 घंटे इस युद्ध का भविष्य तय करेंगे। या तो ईरान बातचीत की मेज पर आएगा, या फिर अमेरिका और इजरायल अपने हमलों की तीव्रता को 'अंतिम प्रहार' (Final Blow) के रूप में और तेज करेंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार पहले ही अस्थिर हो चुका है।




