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Up Kiran,Digital Desk: उत्तर प्रदेश में गन्ना विकास विभाग ने गन्ना सर्वेक्षण प्रणाली को और मजबूत करने के लिए एक प्रभावी और व्यवस्थित प्रशिक्षण योजना लागू की है। इस पहल के जरिए न केवल गन्ना उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा, बल्कि किसानों को सीधे लाभ भी मिलेगा। विभाग ने गन्ने की किस्मों से संबंधित जानकारी और गन्ना निरीक्षण की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए अपने कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देने का फैसला किया है।

कर्मचारियों के प्रशिक्षण का नया कदम

गन्ना विकास विभाग ने इस पहल के तहत विभाग और चीनी मिलों के कुल 5,424 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया। खास बात यह है कि इस प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर्स, जो गन्ना किस्मों के विशेषज्ञ हैं, ने प्रशिक्षण दिया। कर्मचारियों को गन्ने की किस्मों की पहचान, उनके गुण, फील्ड निरीक्षण प्रक्रिया और रिपोर्टिंग प्रणाली की बारीकी से जानकारी दी गई। इस कदम का उद्देश्य खराब और असमान गन्ना किस्मों को सही तरीके से पहचानना और उनकी पहचान को सिस्टम में सही तरीके से दर्ज करना है।

नए बदलावों से किसानों को होगा लाभ

यह नया प्रशिक्षण कार्यक्रम गन्ना किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि इसका उद्देश्य गन्ना उत्पादन की गुणवत्ता को बढ़ाना है। किसानों को अच्छे गुणवत्ता वाले गन्ने की किस्मों के बारे में जानकारी मिलेगी, जिससे वे अपनी उपज को और अधिक लाभकारी बना सकेंगे। गन्ना सर्वेक्षण में पारदर्शिता लाकर विभाग उम्मीद करता है कि फील्ड स्तर पर गन्ने की सही रिपोर्टिंग हो सकेगी।

महत्वपूर्ण बदलावों की सूची

उच्च उत्पादकता वाली किस्मों की बोआई: केवल वह गन्ना किस्में बोई जाएंगी, जिनकी उत्पादकता उच्च हो और जो वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हों।

कम उपज देने वाली किस्मों का समाप्ति: अस्वीकृत और कम उपज देने वाली किस्मों को खेतों से हटा दिया जाएगा।

पर्ची पुनः निर्धारण: समाप्त गन्ने वाले प्लॉट्स की पर्चियों को निरस्त किया जाएगा और नए वास्तविक गन्ना धारकों के लिए पर्चियों का निर्धारण किया जाएगा।

बीज की उपलब्धता के लिए माइक्रोप्लान: बसंतकालीन बोआई के लिए बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक माइक्रोप्लान लागू किया जाएगा।