Up Kiran, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं की ज़मीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पशुपालन विभाग की एक योजना का लाभ लेने वाले बकरी पालक को अनुदान मिलने के बाद भी रिश्वत के दबाव का सामना करना पड़ा। अंततः एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को उजागर कर दिया।
अनुदान के बाद शुरू हुआ दबाव
बरनावा गांव निवासी बकरी पालक सतीश वाल्मीकि को बकरी पालन योजना के तहत 49 हजार रुपये की सहायता राशि मिली थी। उन्होंने इस राशि से बकरियां खरीद लीं, लेकिन इसके बाद विभागीय औपचारिकताओं के नाम पर उनसे पैसों की मांग शुरू हो गई। विकास भवन बागपत में तैनात बाबू अश्वनी कुमार पर आरोप है कि उन्होंने काम आगे बढ़ाने के बदले पहले 15 हजार रुपये मांगे।
रकम घटती गई लेकिन मांग नहीं रुकी
पीड़ित के अनुसार बातचीत के दौरान रिश्वत की रकम पहले 12 हजार रुपये तक लाई गई। लगातार दबाव बनाए जाने के बाद अंत में पांच हजार रुपये देने पर सहमति बनी। इस पूरी प्रक्रिया से परेशान होकर सतीश ने विजिलेंस मेरठ से संपर्क करने का फैसला किया।
शिकायत के बाद विजिलेंस की सटीक कार्रवाई
शिकायत मिलने पर एंटी करप्शन टीम ने पूरी रणनीति के साथ जाल बिछाया। तय योजना के तहत जब आरोपी बाबू रिश्वत की रकम ले रहा था, उसी समय उसे रंगे हाथों पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी विकास भवन परिसर में की गई।

_1186244670_100x75.png)
_1368607442_100x75.png)
_68068861_100x75.png)
_863943578_100x75.png)