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Up kiran,Digital Desk : झारखंड की जेलों में बंद कैदियों को मिलने वाले खाने की क्वालिटी को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन अब इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने एक ऐसा बड़ा कदम उठाया है, जिससे जेल प्रशासन में हड़कंप मचना तय है। गुरुवार को कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए साफ-साफ कह दिया कि अब जेल के खाने की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होगा।

क्या है कोर्ट का बड़ा आदेश?

हाईकोर्ट ने राज्य के सभी जिलों की कानूनी सेवा से जुड़ी टीमों (DLSA) को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों की जेलों में अचानक जाकर छापा मारें और वहां कैदियों को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी को चेक करें। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और अरुण कुमार राय की बेंच ने कहा कि यह जांच की जाए कि कैदियों को जो खाना परोसा जा रहा है, वह जेल के नियमों (जेल मैनुअल) के हिसाब से है भी या नहीं।

अगर खाना खराब मिला तो खैर नहीं!

कोर्ट ने इससे भी आगे बढ़कर एक बहुत बड़ी बात कही है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर किसी भी जेल में खाने की क्वालिटी में कोई गड़बड़ी पाई जाती है या खाना नियमों के हिसाब से नहीं मिलता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी उस जेल के जेलर की होगी। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि ऐसे लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

यह पूरा मामला तब सामने आया, जब आकाश कुमार रॉय नाम के एक व्यक्ति ने कोर्ट में अपील की थी, जिसके बाद कोर्ट ने खाने की क्वालिटी का मुद्दा गंभीरता से लिया। सुनवाई के दौरान बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल के बड़े अधिकारी भी कोर्ट में मौजूद थे और उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब खाने की क्वालिटी में सुधार हुआ है।

कैदी खुद चलाएंगे कैंटीन

इसी के साथ कोर्ट ने एक और अच्छा फैसला सुनाया है। अब जेलों में कैदी खुद अपनी कैंटीन चला सकेंगे, लेकिन यह सब जेलर की निगरानी में होगा। सरकार ने कोर्ट को बताया कि इसके लिए एक कमेटी भी बना दी गई है।

अब सभी जिलों की टीमें जेलों का दौरा कर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपेंगी। इस मामले पर अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि कोर्ट के आदेश का कितना पालन हुआ।