Up kiran,Digital Desk : पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध के बाद भारत सरकार पूरी तरह से सतर्क मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी शुक्रवार शाम को देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करने जा रहे हैं। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य खाड़ी देशों में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए राज्यों की तैयारियों और योजनाओं का जायजा लेना है।
'टीम इंडिया' की भावना से होगा संकट का मुकाबला
केंद्र सरकार इस वैश्विक संकट को केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्दा न मानकर राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जोड़कर देख रही है। पीएम मोदी इस बैठक में 'टीम इंडिया' की भावना पर जोर देंगे, ताकि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों में बेहतर तालमेल (Coordination) सुनिश्चित किया जा सके। युद्ध की स्थिति में विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी, कच्चे तेल की आपूर्ति और घरेलू बाजार पर पड़ने वाले असर जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
बैठक के मुख्य एजेंडे क्या हो सकते हैं?
हालांकि आधिकारिक एजेंडा बैठक के दौरान ही स्पष्ट होगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इन 3 बिंदुओं पर विशेष चर्चा हो सकती है:
भारतीयों की सुरक्षा और निकासी: पश्चिम एशिया में लाखों भारतीय काम करते हैं। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो उनकी सुरक्षित घर वापसी के लिए राज्यों की क्या भूमिका होगी, इस पर रणनीति बनेगी।
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बाधित होने पर राज्यों में ईंधन के भंडार और कीमतों को नियंत्रित करने की योजनाओं की समीक्षा की जाएगी।
आर्थिक प्रभाव: युद्ध के कारण सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों और उससे बढ़ने वाली महंगाई से निपटने के लिए राज्यों को तैयार रहने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश
प्रधानमंत्री इस बैठक के जरिए राज्यों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वैश्विक संकट के इस समय में पूरा देश एकजुट है। बैठक में राज्यों के गृह मंत्रियों और आपदा प्रबंधन विभाग के आला अधिकारियों के भी शामिल होने की उम्मीद है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं और समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरा मंडरा रहा है।




