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Up Kiran, Digital Desk: दुनिया की राजनीति शतरंज के खेल की तरह होती है, जहाँ एक गलत चाल का असर बहुत दूर तक होता है। कुछ ऐसा ही दावा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन ने किया है। उन्होंने अपने ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि ट्रंप की ज़िद की वजह से भारत को उस चीन के साथ बैठने पर मजबूर होना पड़ा, जिसके साथ उसके रिश्ते हमेशा से तनाव भरे रहे हैं।

क्या है पूरा मामला:आपको याद होगा कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले कई सामानों पर भारी-भरकम टैरिफ (एक तरह का टैक्स) लगा दिया था। ट्रंप का तर्क था कि भारत अमेरिकी सामानों पर ज़्यादा टैक्स लगाता है, इसलिए अब अमेरिका भी ऐसा ही करेगा। इस फैसले से दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर एक तरह का तनाव पैदा हो गया।

जेक सुलिवन ने क्या कहा:जेक सुलिवन, जो पहले अमेरिका की सुरक्षा के सबसे बड़े अधिकारियों में से एक रह चुके हैं, का कहना है कि ट्रंप का यह फैसला एक बहुत बड़ी रणनीतिक भूल थी। उन्होंने सरल शब्दों में समझाया:

दोस्तों को दूर किया: भारत, अमेरिका का एक महत्वपूर्ण और स्वाभाविक दोस्त है, खासकर एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए। ऐसे में भारत पर ही टैरिफ लगाकर ट्रंप ने एक दोस्त को नाराज़ कर दिया।

चीन को मिला मौका: जब अमेरिका ने भारत के लिए अपने दरवाज़े महंगे कर दिए, तो भारत के पास व्यापार के लिए नए रास्ते खोजने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। इसका सीधा फायदा चीन को मिला। भारत को न चाहते हुए भी अपने व्यापारिक हितों के लिए चीन के साथ बातचीत करनी पड़ी और संबंध सुधारने की कोशिश करनी पड़ी।

अमेरिका का ही नुक़सान: सुलिवन का मानना है कि इस पूरी स्थिति में सबसे ज़्यादा नुक़सान अमेरिका का ही हुआ। उसने न केवल भारत जैसे एक भरोसेमंद साथी को मुश्किल में डाला, बल्कि अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी चीन को और मज़बूत होने का मौका दे दिया।

सुलिवन की यह बात एक बड़ी चेतावनी की तरह है। यह दिखाती है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लिए गए आर्थिक फैसले सिर्फ़ व्यापार पर नहीं, बल्कि देशों की दोस्ती, दुश्मनी और शक्ति संतुलन पर भी गहरा असर डालते हैं।

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