Up Kiran, Digital Desk: प्रधानमंत्री मोदी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में बुधवार शाम ओमान पहुंचे थे। यह यात्रा भारत-ओमान के बीच कूटनीतिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर सहमति जताई।
बैठक के दौरान भारत और ओमान के बीच कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) पर भी हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के साझा भविष्य का रोडमैप बताते हुए कहा कि यह व्यापार और निवेश के नए अवसर खोलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत-ओमान मित्रता आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी।
समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी पर विशेष जोर
भारत और ओमान के बीच हुए मैरीटाइम दृष्टि प्रपत्र में क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी और महासागर संसाधनों के सतत उपयोग को लेकर साझा प्रतिबद्धता जताई गई है। यह समझौता हिंद महासागर में दोनों देशों की सदियों पुरानी समुद्री साझेदारी को नई दिशा देता है।
इस सहयोग के तहत भारत, ओमान की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े अपने रणनीतिक और ऊर्जा हितों की सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है, जहां से भारत को कच्चे तेल की बड़ी आपूर्ति होती है।
दुक्म पोर्ट से भारत को मिलेगा रणनीतिक लाभ
भारत को पहले से ही ओमान के दुक्म पोर्ट पर सैन्य और लॉजिस्टिक सुविधाओं की पहुंच हासिल है। नया समझौता इस सहयोग को और गहरा करेगा और भारतीय नौसेना को पश्चिमी हिंद महासागर में मजबूत रणनीतिक आधार प्रदान करेगा। दुक्म पोर्ट भारत के लिए एक वैकल्पिक सामरिक ठिकाने के रूप में उभर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का संतुलन बनाने में भी मददगार साबित होगी। उल्लेखनीय है कि ओमान खाड़ी क्षेत्र का एकमात्र ऐसा देश है, जहां भारतीय सेना की थल, जल और वायु—तीनों शाखाएं नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास करती हैं।
तीन देशों की यात्रा के बाद स्वदेश लौटे प्रधानमंत्री मोदी
पीटीआई के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की चार दिवसीय यात्रा पूरी कर स्वदेश रवाना हो गए। ओमान के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री सैयद शिहाब बिन तारिक अल सईद ने उन्हें विदाई दी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस यात्रा को अत्यंत सफल बताते हुए कहा कि इससे भारत के इन देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध और अधिक मजबूत हुए हैं।
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