Up kiran,Digital Desk : भारत को कुरीतियों की बेड़ियों से आजाद करने के लिए देश के जनप्रतिनिधियों ने एक निर्णायक हुंकार भरी है। राजधानी दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में 'एमपी'ज फॉर चिल्ड्रेन' (MPs for Children) के बैनर तले विभिन्न राजनीतिक दलों के 20 से अधिक सांसद एकजुट हुए। इनका एक ही साझा संकल्प है— साल 2030 तक भारत को पूरी तरह 'बाल विवाह मुक्त' बनाना। सांसदों ने इस सामाजिक बुराई के साथ-साथ बच्चों के लिए डिजिटल खतरों (सोशल मीडिया) को भी एक बड़ी चुनौती करार दिया है।
संसद में गूंजेगी आवाज: प्राइवेट बिल और जीरो ऑवर का होगा इस्तेमाल
तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेता और इस अभियान के संयोजक लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने साफ किया कि बाल विवाह किसी धर्म या दल का नहीं, बल्कि मानवता का मुद्दा है। उन्होंने हाल ही में लोकसभा में एक निजी विधेयक (Private Member Bill) भी पेश किया है। इस प्रस्तावित कानून में बाल विवाह रोकने के लिए सख्त सजा, विशेष अदालतों के गठन और एक समर्पित 'डिजिटल रिपोर्टिंग पोर्टल' का प्रावधान है। सांसदों ने तय किया है कि वे संसद के शून्य काल (Zero Hour) का उपयोग कर इस विषय पर सरकार का ध्यान खींचेंगे और अपने संसदीय क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर काम करेंगे।
28 राज्यों में 'मुक्ति रथ' का प्रहार: जमीनी स्तर पर जागरूकता
बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले देश के सबसे बड़े नेटवर्क 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन' के सहयोग से यह मुहिम अब गांवों तक पहुंच चुकी है। इसके संस्थापक भुवन ऋभु ने बताया कि देश के 28 राज्यों और 439 जिलों में 500 से ज्यादा 'बाल विवाह मुक्ति रथ' निकाले गए हैं। इस अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 104 सांसदों के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और जिला कलेक्टरों ने खुद कमान संभाली है। सांसदों ने सरकार से मांग की है कि एक 'राष्ट्रीय बाल विवाह मुक्त भारत दिवस' घोषित किया जाए।
सोशल मीडिया पर उम्र की पाबंदी और डिजिटल सुरक्षा
संवाद के दौरान सांसदों ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी चिंता जताई। टीडीपी नेता देवरायलु ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए उम्र के आधार पर सख्त पाबंदी लगाने की जरूरत बताई। सांसदों का मानना है कि बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों ही तरह के खतरों से सुरक्षित रखना राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त है। इस बैठक में भाजपा, कांग्रेस, सपा, टीडीपी, डीएमके और वामपंथी दलों सहित लगभग सभी प्रमुख पार्टियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर इस राष्ट्रीय प्राथमिकता पर अपनी सहमति जताई।




