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Up Kiran, Digital Desk: क्रिकेट की दुनिया से भारतीय फैंस के लिए एक बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाली खबर आई है. मिनी वर्ल्ड कप कहे जाने वाले हॉन्ग कॉन्ग सिक्सेस (Hong Kong Sixes) टूर्नामेंट में भारतीय टीम का सफर क्वार्टर फाइनल से पहले ही खत्म हो गया है. और सबसे शर्म की बात यह है कि भारत को यह entscheidende हार किसी बड़ी टीम से नहीं, बल्कि कुवैत जैसी एक एसोसिएट टीम के हाथों मिली.

इस हार ने न सिर्फ भारतीय टीम को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया, बल्कि भारतीय क्रिकेट की साख पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.

क्या है यह हॉन्ग कॉन्ग सिक्सेस टूर्नामेंट?

यह क्रिकेट का एक बहुत ही तेज और रोमांचक फॉर्मेट है, जिसे अक्सर क्रिकेट का '5 ओवर का वर्ल्ड कप' भी कहा जाता है.

नियम: हर टीम में 6 खिलाड़ी होते हैं और हर पारी सिर्फ 5 ओवर की होती है. इसमें हर गेंद पर चौका या छक्का लगाने का दबाव होता है.

भारतीय टीम: इस टूर्नामेंट के लिए भारत ने अपनी 'ए' या 'बी' टीम भेजी थी, जिसमें आईपीएल और घरेलू क्रिकेट के कुछ जाने-माने चेहरे शामिल थे.

कुवैत ने कैसे किया 'बड़ा उलटफेर'?

भारत को क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की करने के लिए पूल-सी के इस आखिरी लीग मैच में कुवैत को हराना ज़रूरी था. कागजों पर भारत एक बहुत मजबूत टीम थी और किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि नतीजा कुछ और हो सकता है.

लेकिन मैदान पर जो हुआ, वह भारतीय क्रिकेट के लिए एक शर्मनाक अध्याय बन गया. कुवैत के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर धुनाई की और एक बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया. जवाब में, भारतीय बल्लेबाज इस छोटे से लक्ष्य का पीछा करते हुए लड़खड़ा गए और मैच हार गए.

इस हार के साथ ही भारत पूल-सी में तीसरे स्थान पर खिसक गया, जबकि पाकिस्तान और कुवैत ने इस ग्रुप से क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया.

फैंस का गुस्सा और बड़े सवाल

इस अप्रत्याशित हार के बाद सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा फूट पड़ा है. लोग बीसीसीआई और टीम चयन पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं.

क्या हमने इस टूर्नामेंट को हल्के में लिया?

क्या हमारे घरेलू क्रिकेट के स्टार्स में अंतरराष्ट्रीय दबाव झेलने की क्षमता नहीं है?

कुवैत जैसी टीम से हारना क्या यह नहीं दिखाता कि हम अपनी बेंच स्ट्रेंथ को लेकर सिर्फ झूठे दंभ में जी रहे हैं?

यह हार एक चेतावनी की तरह है. यह बताती है कि क्रिकेट की दुनिया में अब कोई भी टीम छोटी नहीं है और अगर आप मैदान पर अपना 100% नहीं देंगे, तो आपको कोई भी टीम हराकर जा सकती है. फिलहाल, भारतीय टीम के लिए यह टूर्नामेंट एक बुरे सपने की तरह खत्म हो गया है, जिसकी कड़वी यादें फैंस को लंबे समय तक चुभती रहेंगी.