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Up kiran,Digital Desk : भारतीय वायुसेना (IAF) की मारक क्षमता और निगरानी शक्ति को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति को सूचित किया है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक कई बड़े और महत्वपूर्ण रक्षा सौदे पूरे कर लिए जाएंगे। इनमें 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (संभावित राफेल), 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) और उन्नत AEW&C (हवाई चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली) जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।

बजट में 37% का भारी उछाल, नई योजनाओं को मिलेगा पंख

संसदीय समिति को दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार भारतीय वायुसेना के 'कैपिटल बजट' (पूंजीगत बजट) में 37.03% की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। इस फंड का उपयोग न केवल पुरानी देनदारियों को चुकाने में होगा, बल्कि भविष्य के हाई-टेक प्रोजेक्ट्स जैसे कॉम्बैट इनेबलर्स, मीडियम-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस RPA (रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट) और नए फाइटर जेट्स की खरीद के लिए भी किया जाएगा।

114 राफेल विमानों का सौदा: 3.25 लाख करोड़ का 'मेगा प्रोजेक्ट'

इस साल फरवरी में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद को हरी झंडी दे दी है। अनुमान है कि इस विशाल सौदे की लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये होगी।

मेक इन इंडिया: ये विमान फ्रांस की कंपनी 'डसॉल्ट एविएशन' द्वारा एक भारतीय पार्टनर के सहयोग से भारत में ही तैयार किए जाएंगे।

रणनीतिक महत्व: मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए समिति ने वायुसेना से आग्रह किया है कि वे तकनीकी अपग्रेड और आधुनिक हथियारों की खरीद में इस राशि का प्रभावी उपयोग करें।

60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) से बदलेगा परिवहन बेड़ा

वायुसेना के पुराने हो चुके An-32 विमानों के बेड़े को बदलने के लिए 60 नए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की योजना को मंजूरी मिली है। लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में:

फ्लाई-अवे: 12 विमान सीधे तैयार हालत में खरीदे जाएंगे।

स्वदेशी निर्माण: बाकी 48 विमानों का निर्माण देश के भीतर ही किया जाएगा।

प्रमुख दावेदार: इस रेस में एम्ब्रेयर C-390 मिलेनियम, लॉकहीड मार्टिन C-130J सुपर हरक्यूलिस और एयरबस A-400M जैसे दिग्गज विमान शामिल हैं।

AEW&C और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस: दुश्मन पर रहेगी पैनी नजर

मंत्रालय ने 'आसमान की आंख' कहे जाने वाले AEW&C (Airborne Early Warning and Control) सिस्टम के महत्व पर भी जोर दिया। इसके अलावा फ्लाइट रिफ्यूलर और विशेष इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म्स को भी प्राथमिकता दी जा रही है। ये सिस्टम न केवल युद्धक्षेत्र में संचार और इंटेलिजेंस की क्षमता बढ़ाते हैं, बल्कि आधुनिक 'इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर' में कमांडरों को रियल-टाइम जानकारी देकर जीत सुनिश्चित करने में मदद करते हैं।