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मुंबई:12 जून 1994 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के पास स्थित एथेलबाड़ी कस्बे में जन्मे नितेश तिवारी आज भारतीय स्वतंत्र सिनेमा और संगीत जगत का एक जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं। फिल्म निर्देशक, संगीतकार, गीतकार और कहानीकार के रूप में नितेश ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका सफर मेहनत, लगन और उद्देश्यपूर्ण कला का बेहतरीन उदाहरण है।
 

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

नितेश तिवारी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय नंबर 1, बिन्नागुड़ी से पूरी की। उन्होंने वर्ष 2012 में विद्यालय से उत्तीर्ण किया। स्कूल के दिनों से ही उनकी रुचि संगीत, मंचीय कार्यक्रमों और रचनात्मक गतिविधियों में रही। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उनके भीतर छिपे कलाकार को पहचान दिलाई।अनुशासित शैक्षणिक माहौल और कला के प्रति लगाव ने ही आगे चलकर उन्हें फिल्म और संगीत की दुनिया की ओर प्रेरित किया।
 

पारिवारिक पृष्ठभूमि

नितेश तिवारी एक संयुक्त और संस्कारवान परिवार से आते हैं। उनके परिवार में कुल पाँच भाई-बहन हैं। उनके एक छोटे भाई भी हैं, जो वर्तमान में बॉलीवुड में निर्देशक और अभिनेता के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा नितेश की तीन बड़ी बहनें हैं, जिन्होंने हर कदम पर उन्हें भावनात्मक समर्थन दिया।


उनके पिता रामाशंकर तिवारी एक व्यवसायी हैं, जबकि उनकी माता उर्मिला तिवारी एक गृहिणी हैं। फिल्म इंडस्ट्री से किसी प्रकार का पारिवारिक संबंध न होने के बावजूद, उनके माता-पिता ने हमेशा नितेश को अपने सपनों को पूरा करने की पूरी आज़ादी और समर्थन दिया।


रचनात्मक झुकाव और शुरुआती संघर्ष
उत्तर बंगाल की सांस्कृतिक विविधता, लोक संगीत और साहित्यिक माहौल ने नितेश की सोच को गहराई दी। बचपन से ही उन्हें कविता लिखने, धुनें बनाने और कहानियाँ गढ़ने का शौक था। धीरे-धीरे यही शौक एक पेशेवर सफर में बदल गया।
नितेश ने खुद को सिर्फ एक भूमिका तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने निर्देशन, संगीत निर्माण, लेखन, एडिटिंग और प्रोडक्शन—हर पहलू को समझा, जिससे वे एक संपूर्ण कहानीकार बन सके।


संगीत और स्वतंत्र प्रोजेक्ट्स में पहचान
फीचर फिल्मों में आने से पहले नितेश तिवारी ने संगीत एल्बम और म्यूज़िक वीडियो इंडस्ट्री में गहरी पहचान बनाई। उन्होंने अब तक 100 से अधिक म्यूज़िक प्रोजेक्ट्स में संगीतकार और निर्देशक के रूप में काम किया है।
विशेष रूप से ग़ज़ल, सूफ़ी और रोमांटिक संगीत में उनका योगदान काफी सराहा गया। उनका एल्बम “इज़हार-ए-इश्क़” उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
वर्ष 2024 में, इस एल्बम के लिए उन्हें बेस्ट एल्बम अवॉर्ड और बेस्ट ग़ज़ल कंपोज़िशन से सम्मानित किया गया।
फिल्म निर्देशन में कदम: ‘मचान’
नितेश तिवारी की पहली फीचर फिल्म ‘मचान’ को उसकी यथार्थवादी कहानी और सामाजिक संवेदनशीलता के लिए सराहा गया। फिल्म ने आम लोगों की ज़िंदगी, संघर्ष और भावनाओं को सादगी के साथ प्रस्तुत किया।
‘मचान’ ने यह साबित किया कि नितेश मनोरंजन के साथ-साथ समाज को आईना दिखाने वाली सिनेमा में विश्वास रखते हैं।
शॉर्ट फिल्म्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म
नितेश ने ‘डूंगरी टू मुंब्रा’ और ‘एक आशा’ जैसी शॉर्ट फिल्मों के ज़रिये भी सामाजिक विषयों को प्रभावशाली ढंग से पेश किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इन फिल्मों को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
इसके अलावा उन्होंने ‘एक मुलाक़ात आप के साथ’ नामक पॉडकास्ट की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने कलाकारों और रचनात्मक व्यक्तियों से सार्थक संवाद किया।
सम्मान और पुरस्कार
संगीत और सिनेमा में योगदान के लिए नितेश तिवारी को CMW अवॉर्ड्स सहित कई मंचों पर सम्मानित किया गया है। ये पुरस्कार उनके निरंतर प्रयास और गुणवत्ता-पूर्ण काम का प्रमाण हैं।
आगामी फिल्म: ‘गांजा एक्सप्रेस’
वर्तमान में नितेश तिवारी अपनी आगामी फीचर फिल्म ‘गांजा एक्सप्रेस’ पर काम कर रहे हैं। यह फिल्म एक सामाजिक विषय पर आधारित होगी, जो समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करेगी। उनकी पहचान ऐसे विषयों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करने की रही है।
उद्देश्यपूर्ण सिनेमा का चेहरा
नितेश तिवारी मानते हैं कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संवाद और बदलाव का माध्यम भी है। उनके हर प्रोजेक्ट में मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक सरोकार स्पष्ट दिखाई देते हैं।
निष्कर्ष
केंद्रीय विद्यालय नंबर 1, बिन्नागुड़ी से लेकर राष्ट्रीय मंच तक का नितेश तिवारी का सफर संघर्ष, संस्कार और संकल्प की कहानी है। मजबूत पारिवारिक समर्थन, स्पष्ट सोच और कलात्मक ईमानदारी के साथ वे भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
आने वाले समय में नितेश तिवारी से और भी प्रभावशाली फिल्मों और संगीत रचनाओं की उम्मीद की जा रही है।