Up Kiran, Digital Desk: हाल ही में भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया, जब उसने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में ईरान के खिलाफ पश्चिमी देशों के प्रस्ताव का विरोध किया। यह घटना वैश्विक राजनीति में भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण और संतुलित विदेश नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। पश्चिमी देशों, जैसे अमेरिका, फ्रांस और दक्षिण कोरिया, ने ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने का दबाव बनाया था, लेकिन भारत ने डंके की चोट पर अपना रुख साफ किया और ईरान का साथ दिया।
भारत ने किया ईरान का समर्थन
यूएनएचआरसी में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण विवाद हुआ था, जिसमें ईरान की मानवाधिकार स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए। पश्चिमी देशों ने ईरान के हाल के विरोध प्रदर्शनों पर उसकी क्रूर कार्रवाई की निंदा की और जांच की मांग की। यह जांच हजारों मौतों से जुड़ी थी, और ईरान को वैश्विक स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ा। लेकिन जब अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया, तब भारत ने एक अलग दिशा में कदम बढ़ाया। भारत ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जो ईरान के पक्ष में एक मजबूत संकेत था।
भारत का यह कदम न केवल ईरान के लिए एक मजबूत समर्थन था, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को भी प्रदर्शित करता है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता है। यह निर्णय भारत के लिए एक संदेश था, जिससे यह साबित होता है कि वह किसी भी वैश्विक शक्ति के दबाव में नहीं आता और अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेता है।




