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Up kiran,Digital Desk : पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध के नगाड़े बजने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को परमाणु समझौते के लिए दिए गए 10 से 15 दिनों के अल्टीमेटम के बाद अब ईरान ने पलटवार किया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान ने एक बेहद कड़ा पत्र लिखकर साफ चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने किसी भी तरह का सैन्य दुस्साहस किया, तो क्षेत्र में मौजूद एक-एक अमेरिकी सैन्य ठिकाना मलबे में तब्दील कर दिया जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान की हुंकार: 'हथियार और संसाधन होंगे निशाने पर'

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद को भेजे पत्र में अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन और "गैरकानूनी धमकियां" देने का आरोप लगाया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि:

त्वरित कार्रवाई: किसी भी हमले की स्थिति में ईरान का जवाब 'तत्काल और सख्त' होगा।

सैन्य ठिकानों पर खतरा: ईरान ने संकेत दिया है कि इराक, सीरिया और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकाने उसकी मिसाइलों की रेंज में हैं।

आत्मरक्षा का अधिकार: ईरान ने यूएन चार्टर के आर्टिकल-51 का हवाला देते हुए कहा कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा।

ट्रंप का 'डेडलाइन' गेम: 15 दिन या महायुद्ध?

तनाव की मुख्य वजह राष्ट्रपति ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए महज दो हफ्तों का समय दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि बातचीत सफल नहीं रही, तो "परिणाम बहुत बुरे होंगे।"

दबाव की राजनीति: ट्रंप प्रशासन ईरान को आर्थिक और सैन्य रूप से पूरी तरह घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।

विमानवाहक पोतों की तैनाती: अमेरिका ने क्षेत्र में अपने दूसरे विमानवाहक युद्धपोत (USS Gerald R. Ford) को तैनात कर दिया है, जो किसी भी समय स्ट्राइक करने की क्षमता रखता है।

रूस-ईरान की जुगलबंदी ने बढ़ाई बेचैनी

ईरान केवल बयानों तक सीमित नहीं है। उसने हाल ही में ओमान की खाड़ी में रूस के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है। इस युद्धाभ्यास को ट्रंप की धमकी के जवाब में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। रूस का साथ मिलना इस संघर्ष को वैश्विक रूप दे सकता है, जिससे दुनिया भर की चिंताएं बढ़ गई हैं।

क्या युद्ध टल सकता है?

ईरान ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वह "युद्ध नहीं चाहता" और उसने सुरक्षा परिषद से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। हालांकि, कूटनीति के लिए समय बहुत कम बचा है। खाड़ी के पानी में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य हलचल ने इस क्षेत्र को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है।