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Up Kiran, Digital Desk: भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के एक नकली साइंटिस्ट बनकर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का एक सनसनीखेज़ मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में दो भाइयों, अख़्तर हुसैनी और आदिल हुसैनी को गिरफ़्तार किया है। यह मामला सिर्फ़ धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि इसके तार अब अंतरराष्ट्रीय जासूसी और आतंकवाद से भी जुड़ते दिख रहे हैं।

कौन हैं ये भाई और क्या करते थे: 60 साल का अख़्तर हुसैनी, जो "अलेक्जेंडर पामर" नाम का इस्तेमाल करता था, ख़ुद को BARC का बड़ा साइंटिस्ट बताता था। उसने अपने भाई आदिल के साथ मिलकर एक ऐसा गिरोह बनाया जो पिछले 20 सालों से फ़र्ज़ी दस्तावेज़ बनाने का काम कर रहा था। ये दोनों अमेरिका और रूस से परमाणु विज्ञान से जुड़ीं ख़ुफ़िया और तकनीकी किताबें और रिसर्च रिपोर्ट हासिल करते थे।

इसके बाद, ये उन रिपोर्टों से डेटा और डायग्राम चुराकर BARC के नाम से नकली दस्तावेज़ तैयार करते थे। इनके बनाए गए फ़र्ज़ी आईडी कार्ड और मोहर इतने असली लगते थे कि उन्हें पहचान पाना लगभग नामुमकिन था।

विदेशों में बेचते थे देश की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी

जांच में यह भी पता चला है कि इन भाइयों ने अपने फ़र्ज़ी काम को सिर्फ़ देश तक ही सीमित नहीं रखा था। अख़्तर ने तीन भारतीय पासपोर्ट बनवा रखे थे और वह 30 से भी ज़्यादा बार ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की यात्रा कर चुका था। वह ऑनलाइन विदेशी वैज्ञानिकों से संपर्क साधता और फिर विदेश में उनसे मिलकर BARC के फ़र्ज़ी दस्तावेज़ उन्हें बेच देता था। इस काम से उन्होंने करोड़ों रुपये कमाए।

घर से मिलीं चौंकाने वाली चीज़ें: जब पुलिस ने मुंबई के वर्सोवा में अख़्तर के घर पर छापा मारा, तो उनकी आँखें खुली रह गईं। घर से परमाणु हथियारों से जुड़े नक़्शे और कई और संवेदनशील दस्तावेज़ मिले। आदिल की गिरफ़्तारी और इन दस्तावेज़ों के मिलने के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि यह मामला सिर्फ़ पैसों की धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध हो सकता है।

जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या इन भाइयों ने ये ख़ुफ़िया दस्तावेज़ किसी विदेशी अपराधी या आतंकवादी संगठन को तो नहीं बेचे हैं।