Up Kiran, Digital Desk: ब्रेन ट्यूमर एक खतरनाक और जीवन-धातक बीमारी है, लेकिन अगर समय रहते इसका पता चल जाए, तो इसका इलाज संभव हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षण आमतौर पर सिरदर्द, थकान, या कमजोरी जैसे होते हैं, जिसे लोग अक्सर सामान्य बिमारी समझ कर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन यह लापरवाही भविष्य में गंभीर परिणाम दे सकती है।
भारत में ब्रेन ट्यूमर के बढ़ते मामले: एक गंभीर चिंता
हाल के आंकड़ों और मेडिकल रिसर्च के अनुसार, भारत में ब्रेन ट्यूमर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। हर साल देश में लगभग 40,000 से 50,000 नए मरीज सामने आ रहे हैं। इस रुझान से पता चलता है कि यह समस्या अब एक बड़े स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ रही है।
वैश्विक स्तर पर ब्रेन ट्यूमर के कुल मामलों में भारत की हिस्सेदारी 2% से 5% के बीच है। भारत में यह बीमारी कैंसर के सबसे घातक रूपों में शामिल है, क्योंकि यहां अधिकांश मरीज बीमारी के अंतिम चरण में चिकित्सकों के पास पहुंचते हैं, जिससे इलाज की संभावना काफी कम हो जाती है।
ब्रेन ट्यूमर क्या होता है?
ब्रेन ट्यूमर तब उत्पन्न होता है जब मस्तिष्क की कोशिकाओं के डीएनए में परिवर्तन हो जाता है और वे असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। ये कोशिकाएं एक गांठ के रूप में इकट्ठा हो जाती हैं, जिसे ट्यूमर कहा जाता है। चूंकि मस्तिष्क एक सख्त खोपड़ी में स्थित होता है, ट्यूमर का बढ़ना मस्तिष्क पर दबाव डालता है, जिसे इंट्राक्रैनील प्रेशर (ICP) कहते हैं। इस दबाव के कारण सिरदर्द, उल्टी, धुंधली दृष्टि और मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं।
ब्रेन ट्यूमर के प्रकार
ब्रेन ट्यूमर को मुख्य रूप से चार प्रकारों में बांटा जाता है:
बेनाइन ट्यूमर: ये कैंसर रहित होते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते हैं।
मैलिग्नेंट ट्यूमर: ये कैंसरयुक्त होते हैं और तेजी से फैलते हैं।
प्राइमरी ट्यूमर: ये सीधे मस्तिष्क में बनते हैं।
सेकेंडरी ट्यूमर: ये शरीर के अन्य हिस्सों से मस्तिष्क तक फैलते हैं।
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण: क्या ध्यान देना चाहिए?
न्यूरोसर्जन के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि वह मस्तिष्क के किस हिस्से में विकसित हो रहा है। कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
लगातार और तेज सिरदर्द, विशेषकर सुबह के समय।
बार-बार उल्टी या मिचली आना।
अचानक दौरे पड़ना, जो कभी-कभी पहला संकेत हो सकता है।
याददाश्त में कमी या भ्रम की स्थिति।
बोलने और सुनने में दिक्कत।
धुंधली या दोहरी दृष्टि।
चलने में संतुलन की समस्या।
यदि ट्यूमर मस्तिष्क के आगे वाले हिस्से में है, तो यह स्वभाव और निर्णय लेने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है।
किन लोगों को ब्रेन ट्यूमर का अधिक खतरा हो सकता है?
कुछ व्यक्तियों में ब्रेन ट्यूमर का जोखिम ज्यादा हो सकता है। इनमें शामिल हैं:
जिनके परिवार में पहले से किसी को ब्रेन ट्यूमर हो।
जो लोग लंबे समय तक रेडिएशन या हानिकारक रसायनों के संपर्क में रहते हैं।
40-50 वर्ष की आयु के लोग।
जो लोग पेंट, ईंधन या अन्य रासायनिक पदार्थों के संपर्क में काम करते हैं।
ब्रेन ट्यूमर से बचाव के उपाय
हालांकि ब्रेन ट्यूमर से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियों से इसके जोखिम को कम किया जा सकता है:
बिना आवश्यकता के एक्स-रे और सीटी स्कैन से बचें।
रेडिएशन और हानिकारक रसायनों से दूरी बनाए रखें।
एक हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं, जिसमें संतुलित आहार और नियमित व्यायाम शामिल हो।
डॉक्टर से नियमित जांच कराएं, विशेष रूप से अगर सिरदर्द, उल्टी, या व्यवहार में कोई असामान्य बदलाव महसूस हो।

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