Up Kiran, Digital Desk: 25 वर्षीय जेमिमा ने 30 अक्टूबर को नवी मुंबई में ऑस्ट्रेलिया को हराकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम को ऐतिहासिक सेमीफाइनल जीत दिलाई थी। लेकिन जहां एक तरफ जेमिमा की इस जीत का स्वागत किया गया, वहीं कुछ शरारती और महिला विरोधी ट्रोल्स ने सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बना लिया।
कठिन दौर से गुजरने के बाद भी जेमिमा ने दिखाया साहस
हालांकि, जेमिमा ने अपनी भावना और संघर्ष को साझा करते हुए बताया कि टूर्नामेंट की शुरुआत में वह मानसिक दबाव और बेचैनी का सामना कर रही थीं। उन्होंने कहा, "कुछ मैचों से पहले मैं अपनी मां से फोन पर बात करती थी और रोती रहती थी। यह एक कठिन समय था, लेकिन मेरे परिवार और दोस्तों ने मुझे हिम्मत दी।"
धर्म को लेकर हमले, शिखा पांडे का समर्थन
जेमिमा पर सोशल मीडिया पर उनके धर्म को लेकर भी कई हमले किए गए। जब उन्होंने अपनी शानदार पारी के बाद ईसा मसीह का धन्यवाद किया, तो कुछ ट्रोल्स ने उन्हें निशाना बना लिया। जेमिमा ने कहा था, "मैं ईसा मसीह का शुक्रिया अदा करती हूँ, मुझे उनका आशीर्वाद मिला है और मैं यह अकेले नहीं कर सकती थी।"
इस पर शिखा पांडे ने सोशल मीडिया पर उनका समर्थन करते हुए लिखा, "जेमी भगवान की पसंदीदा संतान हैं, और अगर आपको यह नहीं पसंद आ रहा तो हमें माफ कीजिए, लेकिन अब कोई भी आपकी मदद नहीं कर सकता।" पांडे का यह बयान उनकी साथी खिलाड़ी के प्रति पूरी तरह से समर्थन दिखाता है।
भारत की पहली ऐतिहासिक जीत
सेमीफाइनल में जेमिमा की नाबाद 127 रन की शानदार पारी ने भारत को महिला क्रिकेट विश्व कप के तीसरे फाइनल में पहुंचाया। जेमिमा के संघर्ष और सफलता की कहानी ने हर किसी को प्रभावित किया है, खासकर उनकी मानसिक मजबूती को देखकर।
इस जीत से भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक नए अध्याय की शुरुआत की है, जो एक बार फिर दिखाता है कि कड़ी मेहनत और संघर्ष से कोई भी मुश्किल आसान हो सकती है।
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