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Up kiran,Digital Desk : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता कांति गांगुली ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर अपनी राय खुलकर रखी है। उनका कहना है कि मतदाता सूची के इस पुनरीक्षण का असर सबसे ज्यादा उन हिंदुओं पर पड़ सकता है, जो बांग्लादेश से पलायन कर पश्चिम बंगाल में आकर बसे हैं।

पूर्व मंत्री कांति गांगुली को शुक्रवार को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया गया है। इससे पहले गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ किया कि वह एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में नहीं हैं, बल्कि इसे जरूरी मानते हैं। हालांकि, उनका मानना है कि इतने बड़े काम के लिए समय बहुत कम रखा गया है।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण एक बेहद जटिल और व्यापक प्रक्रिया है। इसे सिर्फ दो-तीन महीनों में पूरा करना व्यवहारिक नहीं लगता। भारत जैसे विशाल देश में, जहां आबादी भी बहुत अधिक है, वहां चुनावी सूचियों को सही और पारदर्शी तरीके से अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था।

कांति गांगुली के मुताबिक, अगर इस प्रक्रिया को और ज्यादा समय के साथ लागू किया जाता, तो यह ज्यादा भरोसेमंद और त्रुटिरहित बन सकती थी। उनका मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है, लेकिन जल्दबाजी में की गई प्रक्रिया से कई योग्य मतदाता प्रभावित हो सकते हैं।