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Up Kiran, Digital Desk: ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने न सिर्फ राजनीतिक हलचल बढ़ाई है, बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया है। देशभर में सरकारी नीतियों के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे सुरक्षा बलों के बीच तनाव और झड़पों की स्थिति बन गई है। इस संकटपूर्ण स्थिति को देखते हुए ईरान सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया है, जिसके चलते आम नागरिकों और विदेशी नागरिकों के लिए देश से बाहर संपर्क करना भी मुश्किल हो गया है।

भारत सरकार ने इस दौरान ईरान में फंसे अपने नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवायजरी जारी की है। अब सवाल यह उठता है कि ईरान में कितने भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं और क्या उन्हें सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल पाना संभव होगा?

भारत सरकार की एडवायजरी: नागरिकों के लिए सख्त दिशा-निर्देश

5 जनवरी 2025 को जारी भारत सरकार की नई एडवायजरी में नागरिकों से अपील की गई है कि वे जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की कोशिश करें। सरकार ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे वाणिज्यिक उड़ानों के माध्यम से देश से बाहर निकलने का प्रयास करें। साथ ही, उन्हें प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने और किसी भी अनहोनी से बचने के लिए पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

एडवायजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारतीय नागरिक अपने पासपोर्ट और पहचान पत्र हमेशा तैयार रखें और भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।

ईरान में भारतीय नागरिकों की संख्या और उनकी सुरक्षा की चुनौती

ईरान में भारतीय नागरिकों की संख्या करीब 10,000 से 12,000 के बीच बताई जा रही है। इनमें बड़ी संख्या में छात्र हैं, जिनमें मेडिकल और धार्मिक अध्ययन करने वाले विद्यार्थी शामिल हैं। इसके अलावा, छोटे व्यापारी, तकनीकी पेशेवर और कुछ पर्यटक भी ईरान में रह रहे हैं। इन विविध समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, खासकर जब हालात इतने अस्थिर हो।

निकासी ऑपरेशन की जटिलताएं: सुरक्षा, मार्ग और अन्य बाधाएं

ईरान से भारतीय नागरिकों की निकासी उतनी आसान नहीं होगी। इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण सूचना का आदान-प्रदान मुश्किल हो गया है और कई इलाकों में आवाजाही पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके अलावा, उड़ानें सीमित हो सकती हैं। ऐसे में सरकार को विशेष चार्टर्ड फ्लाइट्स, कूटनीतिक अनुमति और वैकल्पिक मार्गों की तलाश करनी पड़ सकती है। निकासी के लिए पड़ोसी देशों के हवाई अड्डों के माध्यम से भी रास्ते खोले जा सकते हैं।

आर्थिक बोझ और संभावित खर्च: कितनी हो सकती है लागत?

अगर भारतीय नागरिकों को विशेष चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए निकालना पड़ा, तो सरकार को प्रत्येक व्यक्ति पर 60,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है। इसमें विमान चार्टर, सुरक्षा व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स, और आपातकालीन सहायता शामिल है। कुल मिलाकर, इस ऑपरेशन का खर्च कई सौ करोड़ रुपये तक जा सकता है। हालांकि, सरकार आमतौर पर वाणिज्यिक उड़ानों को प्राथमिकता देती है, ताकि सरकारी खजाने पर कम से कम बोझ पड़े।