img

Up kiran,Digital Desk : ईरान में जारी सरकार-विरोधी अशांति के बीच कश्मीरी छात्रों के परिजन चिंता की स्थिति से गुजर रहे हैं और उन्होंने भारत सरकार से उनके बच्चों को सुरक्षित वापस लाने की अपील की है। भारी तनाव, इंटरनेट ब्लॉक और रहन-सहन की मुश्किलों के बीच परिवार बेहद परेशान हैं और अब केंद्र से त्वरित हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे हैं।

कुछ दिन पहले तेहरान में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो आर्थिक समस्याओं से पहले राजनीतिक मांगों तक फैल गए हैं। देश भर में अनिश्चितता और तनाव के चलते कश्मीर समेत कई परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

परिवारों ने सरकार से क्या कहा

श्रीनगर में कई चिंतित माता-पिता प्रेस एंक्लेव के सामने इकट्ठा हुए और प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल से तुरंत कार्रवाई का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार पहले भी विदेशों से अपने नागरिकों को सुरक्षित बाहर लाने में सफल रही है और अब भी ऐसा ही करना चाहिए, ताकि छात्रों को जोखिम का सामना न करना पड़े।

अभिभावकों का कहना है कि भारत के दूतावास ने छात्रों को सलाह दी है कि वे स्वयं ईरान छोड़ दें, लेकिन इंटरनेट की कटौती के कारण उन्हें अपनी यात्रा की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है। कई माता-पिता ने बताया कि टिकट बुक कर देने के बावजूद बच्चों को भेजना मुश्किल है और सरकार को वैकल्पिक और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए।

स्थिति कितनी गंभीर है?

आईएनडीआईएटी ने कहा है कि ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें से कई छात्र शामिल हैं। स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है और देश भर में विरोध प्रदर्शन के कारण सुरक्षा का संकट गहराता जा रहा है।

कश्मीरी छात्र अस्थिर माहौल के बीच न सिर्फ अपनी पढ़ाई बल्कि रोजमर्रा की ज़िंदगी में भी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इंटरनेट ब्लॉक से बात-चीज़ और भी चुनौतीपूर्ण बन गई है, जिससे परिजन और छात्र दोनों ही और ज़्यादा चिंतित हैं।

अभिभावकों की मांग है कि सरकार भारत की ओर से समन्वित निकासी योजना बनाए और छात्रों को सुरक्षित होकर घर लाया जाए।