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Up Kiran, Digital Desk: हर हिंदू घर में सुबह और शाम की पूजा का रिवाज़ सदियों से चला आ रहा है। लोग मानते हैं कि नियमित पूजा से न सिर्फ मन को सुकून मिलता है बल्कि घर का माहौल भी सकारात्मक बना रहता है। लेकिन छोटी-छोटी बातों को लेकर अक्सर कन्फ्यूजन हो जाता है। खासकर शाम के समय जलने वाला दीया आखिर रखा कहाँ जाए कि उसका पूरा फायदा मिले? आज हम इसी सवाल का आसान और सटीक जवाब लेकर आए हैं।

मुख्य द्वार पर दीया: नकारात्मकता का सबसे बड़ा कवच

शास्त्रों में गोधूलि बेला यानी शाम का वक्त बेहद खास माना गया है। इस समय घर के मुख्य दरवाजे पर एक दीया जलाकर रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे घर में कोई बुरी शक्ति या नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती। बाहर से आने वाली बुरी नजर भी दरवाजे पर ही रुक जाती है।

बस इतना ध्यान रखें कि दीया ऐसा रखें कि हवा से बुझे नहीं और किसी को आने-जाने में तकलीफ भी न हो। बहुत से घरों में लोग इसे दाहिनी तरफ थोड़ा ऊंचे स्थान पर रखते हैं। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और रात भर सुरक्षा का एहसास रहता है।

तुलसी के पास दीया: माँ लक्ष्मी को सीधा न्योता

घर में तुलसी का पौधा हो तो शाम का दीया वहाँ जरूर जलाना चाहिए। हमारे बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि तुलसी के पास जलता दीया देखकर माँ लक्ष्मी खुद घर में प्रवेश करती हैं। कहते हैं जिस घर में रोज तुलसी के आगे दीया जलता है वहाँ धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।

लेकिन एक बात का खास खयाल रखें। तुलसी के आसपास हमेशा साफ-सफाई रखें। सूखे पत्ते या कोई कचरा पड़ा हो तो पहले उसे हटा दें। दीया जलाने से पहले तुलसी को जल चढ़ाना न भूलें। फिर आराम से दीया जला दें। इसका असर कुछ ही दिनों में दिखने लगता है।

कौन सा तेल डालें? सरसों का तेल रहता है नंबर वन

लोग अक्सर पूछते हैं कि दीये में किस तेल का इस्तेमाल करें। जवाब बहुत सीधा है। शाम के दीये में शुद्ध सरसों का तेल सबसे उत्तम माना जाता है। सरसों का तेल नकारात्मकता को दूर भगाने में सबसे ज्यादा कारगर होता है। बहुत से घरों में पीढियों से यही परंपरा चली आ रही है।

कुछ लोग तिल का तेल भी इस्तेमाल करते हैं और वह भी पूरी तरह शुभ फल देता है। बस पूजा का तेल अलग रखें। रोज का खाना बनाने वाला तेल पूजा में न डालें। एक छोटा सा अलग घी या तेल का डिब्बा रख लें। इससे पूजा की पवित्रता भी बनी रहती है और तेल भी खराब नहीं होता।