Up Kiran, Digital Desk: भारत में कच्चे तेल के आयात के मामले में वेनेजुएला का योगदान नगण्य होने के कारण, हालिया राजनीतिक घटनाओं का तेल की कीमतों पर कोई बड़ा असर होने की संभावना नहीं है। क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, वेनेजुएला में राजनीतिक उथल-पुथल और कच्चे तेल के उत्पादन में किसी प्रकार की रुकावट का वैश्विक बाजार पर प्रभाव सीमित रहेगा, क्योंकि इस देश की तेल आपूर्ति वैश्विक स्तर पर बहुत कम है।
वेनेजुएला का कच्चा तेल और वैश्विक आपूर्ति
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनाए रखते हुए ब्रेंट क्रूड पिछले कुछ दिनों से 60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। क्रिसिल रेटिंग्स का मानना है कि अगर वेनेजुएला में तेल उत्पादन में कोई बड़ी रुकावट आती भी है, तो उसका असर तेल की कीमतों पर नगण्य ही रहेगा, क्योंकि इस देश की हिस्सेदारी केवल 1.5 प्रतिशत है।
भारत पर कोई विशेष असर नहीं
भारत के संदर्भ में देखा जाए तो वेनेजुएला से होने वाले आयात का प्रभाव बहुत सीमित है। भारत में तेल आयात का कुल हिस्सा लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल से संबंधित है, और वेनेजुएला की भूमिका केवल 1 प्रतिशत तक ही सीमित है। भारत के लिए वेनेजुएला से तेल आयात की स्थिति स्थिर बनी हुई है।
वाणिज्यिक रिश्तों का प्रभाव
भारत और वेनेजुएला के बीच व्यापारिक संबंध भी अपेक्षाकृत बहुत कम हैं। वेनेजुएला से भारत का कुल आयात महज 0.25 प्रतिशत के आसपास है, जो भारत के समग्र व्यापार के मुकाबले बहुत छोटा हिस्सा है। इसलिए, इस देश के राजनीतिक बदलावों का भारतीय कंपनियों की साख या व्यापार पर कोई महत्वपूर्ण असर होने की संभावना नहीं है।
आने वाले महीनों में स्थिरता की उम्मीद
जहां एक ओर वेनेजुएला के भीतर राजनीतिक तनाव और संघर्ष जारी है, वहीं वैश्विक तेल बाजार पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत हल्का ही रहने का अनुमान है। विशेष रूप से भारत जैसे देशों के लिए जहां अन्य स्रोतों से कच्चे तेल की आपूर्ति मजबूत है, वहां तेल की कीमतों में बड़ी उथल-पुथल की संभावना कम ही है।




