Up kiran,Digital Desk : केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने प्रशासनिक और विभागीय कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले किए हैं। सीआइएसएफ दिल्ली मुख्यालय द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, देश भर की विभिन्न इकाइयों में तैनात 62 सहायक कमांडेंट (Assistant Commandants) को स्थानांतरित किया गया है।
मुख्यालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी स्थानांतरित अधिकारी 3 अप्रैल 2026 तक अपनी वर्तमान यूनिट से विरमित (Relieve) होकर नई इकाई में अपना योगदान (Joining) सुनिश्चित करेंगे।
तबादले की मुख्य वजह और चयन प्रक्रिया
सीआइएसएफ के इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था और विभागीय दक्षता को और अधिक प्रभावी बनाना है। स्थानांतरण सूची में प्रमुख रूप से उन अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपनी वर्तमान इकाई में 3 से 4 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया था। रूटीन रोटेशन के तहत यह कदम उठाया गया है ताकि महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों की सुरक्षा में नया दृष्टिकोण लाया जा सके।
प्रमुख अधिकारियों का स्थानांतरण विवरण
तबादले की इस सूची में देश के कई महत्वपूर्ण इस्पात संयंत्रों, हवाई अड्डों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के अधिकारी शामिल हैं। प्रमुख नामों की सूची नीचे दी गई है:
| अधिकारी का नाम | वर्तमान इकाई (From) | नई इकाई (To) |
|---|---|---|
| तजबेर सिंह रौतेला | BSL बोकारो (झारखंड) | NTPC तपोवन (उत्तराखंड) |
| अमित सैनी | BCCL धनबाद (झारखंड) | वडोदरा एयरपोर्ट (गुजरात) |
| खुर्शीद परवेज | मुंबई एयरपोर्ट | BCCL धनबाद (झारखंड) |
| अमित रंजन | जयपुर एयरपोर्ट | NSP C दुर्गापुर (प. बंगाल) |
| राजू राम | वाराणसी एयरपोर्ट | दुर्गापुर इस्पात संयंत्र (SAIL) |
| प्रवीण कुमार झा | BHEL भोपाल | RTPP पुरुलिया (प. बंगाल) |
| एन लता | RTC थाकोलम | रिजर्व बटालियन, रांची |
| अजय प्रजापति | दुर्गापुर इस्पात संयंत्र | PHC नई दिल्ली |
| राजेश पाण्डेय | RTC देवली | RTC मुंडली |
सुरक्षा के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
सीआइएसएफ भारत का एक विशेष अर्धसैनिक बल है, जिसकी जिम्मेदारी देश के अति-महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (हवाई अड्डे, परमाणु संस्थान, मेट्रो और बंदरगाह) की रक्षा करना है।
नई ऊर्जा: लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से आने वाली एकरसता को खत्म करने के लिए रोटेशन अनिवार्य है।
अनुभव का साझा: अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे एयरपोर्ट से कोयला खदान या ट्रेनिंग सेंटर) में तैनाती से अधिकारियों का अनुभव व्यापक होता है।
समय सीमा का महत्व: 3 अप्रैल तक योगदान देने का कड़ा निर्देश यह सुनिश्चित करता है कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई गैप न आए।




