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Up kiran,Digital Desk : पश्चिम एशिया (Middle East) इस समय दुनिया का सबसे खतरनाक फ्लैशप्वाइंट बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए '15 दिनों के अल्टीमेटम' ने आग में घी डालने का काम किया है। ट्रंप की इस सीधी धमकी के जवाब में अब ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से अमेरिका को खुली चुनौती दे डाली है। तेहरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने एक भी गोली चलाई, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने, हथियार और संसाधन ईरान की मिसाइलों का पहला निशाना होंगे।

संयुक्त राष्ट्र को लिखा कड़ा पत्र, बचाव के लिए 'आर्टिकल-51' का हवाला

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद को एक आधिकारिक पत्र भेजकर अमेरिका की धमकियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। पत्र में ईरान ने वाशिंगटन पर 'गैरकानूनी धमकियां' देने और क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह युद्ध का समर्थक नहीं है, लेकिन अगर उसकी संप्रभुता पर हमला हुआ, तो वह चुप नहीं बैठेगा। ईरान ने अपनी रक्षा के अधिकार को यूएन चार्टर के अनुच्छेद-51 के तहत वैध बताते हुए कहा कि वह 'त्वरित और आनुपातिक' जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ट्रंप का 15 दिन का 'डेथ वारंट' और परमाणु डील का पेंच

तनाव की मुख्य जड़ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान के लिए 'करो या मरो' जैसी स्थिति पैदा कर दी है। ट्रंप ने एयरफोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए दोटूक कहा कि ईरान के पास नया परमाणु समझौता करने के लिए महज 10 से 15 दिन का समय बचा है। ट्रंप की चेतावनी थी कि यदि इन दिनों में समझौता नहीं हुआ, तो ईरान को ऐसे 'बुरे परिणाम' भुगतने पड़ सकते हैं जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी।

खाड़ी के पानी में बढ़ी सैन्य हलचल, ईरान-रूस की जुगलबंदी

महज बयानों तक बात सीमित नहीं है; धरातल पर भी सेनाएं आमने-सामने हैं। एक ओर ईरान ने रूस की नौसेना के साथ मिलकर ओमान की खाड़ी में शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया है, तो दूसरी ओर अमेरिका ने अपना दूसरा और दुनिया का सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford मध्य-पूर्व की ओर रवाना कर दिया है। खाड़ी के पानी में तैरते ये लोहे के पहाड़ और आसमान में गूंजते फाइटर जेट्स की गर्जना बता रही है कि हालात कितने संवेदनशील हो चुके हैं।

क्या टल पाएगा युद्ध? पूरी दुनिया की सांसें अटकीं

ईरान ने सुरक्षा परिषद से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि तनाव को और अधिक बढ़ने से रोका जा सके। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की 15 दिनों की समय सीमा ने कूटनीति के लिए दरवाजे बहुत छोटे कर दिए हैं। सैन्य तैयारियां, तीखे पलटवार और रणनीतिक घेराबंदी ने माहौल को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगले दो हफ्तों में तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई रास्ता निकलता है या खाड़ी क्षेत्र एक और विनाशकारी युद्ध की आग में झुलस जाएगा।