Up Kiran, Digital Desk: अमेरिका में बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपनी जमीन, दुकान, और संपत्ति बेचकर वहां जाने का सपना देखने वाले हरियाणा के कई युवक अब अपने सपनों के टूटने का दर्द झेल रहे हैं। कुछ ही दिनों पहले, इन युवकों को अमेरिका से वापस भेजने के बाद, उन्हें हथकड़ियों में जकड़कर डिपोर्ट किया गया। इन घटनाओं ने उन युवाओं के मनोबल को तोड़ दिया है, जो विदेश में बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर गए थे।
खतरनाक रास्ते और ठगी का शिकार
हरियाणा के करनाल और कैथल से जुड़े कुछ युवक ने अमेरिका जाने के लिए जमीन, दुकानें और यहां तक कि अपने परिवार की सारी संपत्ति बेच डाली थी। इनमें से कुछ युवकों ने जंगली रास्तों का रास्ता अपनाया, जिसे ‘डंकी रूट’ कहा जाता है। इस रास्ते में, उन्हें न केवल कठिन भौतिक हालातों का सामना करना पड़ा, बल्कि रास्ते में ठगी और अपमान भी झेलना पड़ा। रजत पाल जैसे युवकों ने इस यात्रा को जिंदा रहने की जंग माना, क्योंकि इन जंगली रास्तों में, भूख और ठगी एक आम बात बन चुकी थी।
जेल में बिताए गए 14 महीने
अमेरिका पहुंचने के बाद, इन युवकों को हिरासत में ले लिया गया और वहां कई महीनों तक जेल में रखा गया। नरेश कुमार जैसे युवकों ने 57 लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन जब वे अमेरिकी जेल में पहुंचे, तो उन्हें एहसास हुआ कि यह सारा रास्ता उनके लिए एक बुरा सपना बन चुका है। इन युवकों की उम्मीदें उस समय पूरी तरह से टूट गईं, जब उन्हें डिपोर्ट कर दिया गया। हरजिंदर सिंह जैसे युवक जिन्होंने अमेरिका में शेफ की नौकरी की थी, वे भी सम्मान की बातों को भूल चुके थे, क्योंकि वहां के प्रशासन ने उनके साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया।
कर्ज और संपत्ति की बर्बादी
अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने की उम्मीद में माता-पिता ने अपनी संपत्तियां बेच डाली थीं, लेकिन ये उम्मीदें चकनाचूर हो गईं। विशाल, रजत के भाई, ने खुद बताया कि उसने एक प्लॉट और दुकान बेचकर 45 लाख रुपये इकट्ठा किए थे। अमेरिका में प्रवेश की गारंटी के लिए एक एजेंट ने उनसे और भी पैसे वसूल किए थे, लेकिन अंत में उन्हें असफलता ही हाथ लगी।
प्रशासन की निष्ठुरता
हरजिंदर सिंह जैसे युवकों को समझ में आ गया कि अमेरिका में भविष्य बनाने का सपना केवल एक झूठ था। उनके लिए सबसे कष्टकारी अनुभव था अमेरिकी प्रशासन का निष्ठुर व्यवहार। उन्हें 25 घंटे तक हथकड़ियों में जकड़ कर रखा गया, और उनके साथ एक अपराधी की तरह पेश आया गया। इससे उनके आत्म-सम्मान को गहरी चोट पहुंची।
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