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UP Kiran,Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ कार्यालय के उद्घाटन के साथ एक महत्वपूर्ण कदम उठाया, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। ‘लखपति दीदी’ योजना को नया आयाम देते हुए, मोदी ने इस योजना के लक्ष्य को दोगुना करने का ऐलान किया। अब 6 करोड़ महिलाएं इस योजना से लाभान्वित होंगी, जो पहले केवल 3 करोड़ थीं। इस पहल को 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता की ओर एक बड़ा कदम

‘लखपति दीदी’ योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को वित्तीय सहायता, बैंक से आसान ऋण, कौशल विकास प्रशिक्षण और विपणन सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं न केवल अपनी आय में वृद्धि करेंगी, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर भी मजबूत कदम बढ़ाएंगी।

महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव

ग्रामिण महिलाओं की भूमिका को लेकर देशभर में कई बदलाव देखे गए हैं, लेकिन अब सरकार ने उनकी स्थिति को और मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प और छोटे उद्योगों में महिलाओं का योगदान तो पुराना है, लेकिन वे अक्सर संसाधनों की कमी और सही बाजार तक पहुंचने में असमर्थ रहती थीं। इस योजना के तहत अब उन्हें डिजिटल लेन-देन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से बाजार से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी।

आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को मजबूती

‘लखपति दीदी’ योजना का विस्तार न केवल महिला सशक्तिकरण का एक और कदम है, बल्कि यह भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तो इसका प्रभाव न केवल उनके परिवारों पर बल्कि समाज पर भी पड़ता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार से समाज की समृद्धि भी बढ़ेगी। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी से सामाजिक विकास के नए आयाम भी खुलेंगे।