UP Kiran,Digital Desk: भारत की वायुसेना (IAF) के लिए एक अहम कदम उठाया गया है, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दी गई। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब भारत अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है और अधिक 'स्क्वाड्रन' जोड़ने की योजना बना रहा है।
राफेल जेट्स से नई ताकत
वायुसेना की लड़ाकू क्षमता में सुधार के लिए वर्षों से कोशिशें चल रही थीं। नए राफेल जेट्स के शामिल होने से वायुसेना का बेड़ा न केवल और मजबूत होगा, बल्कि पड़ोसी देशों से बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच युद्ध की तैयारियों में भी मजबूती आएगी। यह कदम भारत की ऑपरेशनल रेडीनेस को और भी पुख्ता करेगा, जिससे युद्ध के समय त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया की संभावना बढ़ेगी।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति का दौरा और रणनीतिक पहल
इस निर्णय की अहमियत इस बात से और बढ़ जाती है कि यह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे से पहले लिया गया है। यह कदम दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूती देगा, खासकर रक्षा क्षेत्र में।
नई तकनीकों से मिलेगा लाभ
इस डील के जरिए भारत-फ्रांस के बीच उन्नत तकनीकों का आदान-प्रदान होगा, जिसमें इंजन निर्माण, एवियोनिक्स, और हथियारों का इंटीग्रेशन शामिल है। इस साझेदारी से भारत को तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी कदम बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त, बैठक में हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (HAPS) जैसी नई तकनीकों को मंजूरी भी दी गई है, जिससे सीमा पर निगरानी और नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध कौशल में भारत को बड़ी बढ़त मिलेगी।
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