Up Kiran, Digital Desk: भारत में मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग का मुद्दा नया नहीं है, लेकिन दून मेडिकल कॉलेज में हाल ही में जो मामला सामने आया है, उसने सभी को चौंका दिया है। यहां 150 जूनियर छात्रों ने सीनियर छात्रों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है, जो उनके लिए डर और असुरक्षा का कारण बने हुए थे। दिलचस्प यह है कि छात्रों को अपनी शिकायत कॉलेज के प्रिंसिपल के बजाय सीधे नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) तक पहुंचानी पड़ी, जो खुद में एक गंभीर संकेत है कि कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया कितनी धीमी और निष्क्रिय रही।
जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग कर रहे थे सीनियर
यह घटना 2023-24 बैच के उन 9 सीनियर छात्रों के कारण उत्पन्न हुई, जो 2025 बैच के जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग कर रहे थे। इस बैच में कुल 150 छात्र थे, जो इन सीनियर छात्रों द्वारा उत्पीड़ित हो रहे थे। जूनियर छात्रों का कहना था कि सीनियर छात्र उन्हें न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक रूप से भी परेशान करते थे। आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें धमकियां मिलती थीं और प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल रही थी। ऐसे में छात्रों ने मजबूर होकर NMC तक अपनी शिकायत पहुंचाई।
NMC की सख्त कार्रवाई और कॉलेज प्रशासन की लापरवाही
जब यह मामला NMC तक पहुंचा, तो उन्होंने तुरंत कॉलेज प्रशासन को आदेश दिए कि मामले की जांच की जाए। इसके बाद कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. गीता जैन ने मामले को गंभीरता से लिया और एंटी रैगिंग कमेटी से रिपोर्ट मांगी। इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई और आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए।
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