Up Kiran, Digital Desk: लेह में हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद हालात गंभीर हो गए हैं। भारतीय सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। अब पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर पाबंदी है। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी सार्वजनिक आयोजन, रैली या मार्च के लिए पहले से लिखित अनुमति लेनी होगी।
हिंसक मोड़ पर पहुँचा आंदोलन, पुलिस फायरिंग में कई घायल
हालात तब बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों ने कथित रूप से एक स्थानीय भाजपा दफ्तर को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद पुलिस को हालात काबू में लाने के लिए गोलियां चलानी पड़ीं। इस घटना में 70 से अधिक लोग घायल हो गए। यह सब उस व्यापक आंदोलन के दौरान हुआ, जिसमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की माँग की जा रही है।
सोनम वांगचुक पर भड़काऊ बयानबाज़ी का आरोप
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भी कटघरे में खड़ा किया है। मंत्रालय का दावा है कि वांगचुक की "उकसाने वाली" टिप्पणियों ने लोगों को हिंसक प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। बता दें कि वांगचुक ने हाल ही में 35 दिन लंबा अनशन समाप्त किया था, जिससे पूरे इलाके में आंदोलन को बल मिला।
राजनीति गरमाई, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
भाजपा ने इस हिंसा के पीछे कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि विरोध को जनरल ज़ेड के नेतृत्व में दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन असल में इसकी कमान कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के हाथ में थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अपर लेह वार्ड के पार्षद स्टैनज़िंग त्सेपांग इस हिंसा के मुख्य सूत्रधार थे।
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