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Up Kiran, Digital Desk: आंध्र प्रदेश के उन हजारों युवाओं और छोटे व्यापारियों के लिए आज का दिन एक नई उम्मीद लेकर आया है, जो अपना खुद का काम शुरू करने का सपना तो देखते हैं, लेकिन सही जगह और सुविधाओं की कमी के चलते हिम्मत नहीं जुटा पाते। आज मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू एक ऐसी शुरुआत करने जा रहे हैं, जिससे राज्य के औद्योगिक नक्शे की तस्वीर हमेशा के लिए बदल सकती है।

आज मुख्यमंत्री प्रकाशम जिले के कनिगिरि में रहेंगे, लेकिन उनकी नजर पूरे आंध्र प्रदेश पर होगी। वह कनिगिरि की धरती से ही, एक बटन दबाकर, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बने दर्जनों MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) पार्कों का वर्चुअली उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।

क्या है सरकार का यह 'मास्टरप्लान'?

यह कोई छोटी-मोटी घोषणा नहीं है। सरकार ने इसके लिए एक बहुत बड़ा और ठोस प्लान तैयार किया है:

15 नए पार्क खुलेंगे: राज्य के 17 जिलों में बनकर तैयार हो चुके 15 नए इंडस्ट्रियल पार्कों को आज से शुरू कर दिया जाएगा। ये पार्क लगभग 329 एकड़ जमीन पर फैले हुए हैं।

35 पार्कों की और नींव रखी जाएगी: इसके साथ ही, लगभग 587 एकड़ जमीन पर 35 और नए सरकारी और निजी MSME पार्कों के निर्माण कार्य की भी आज ही शुरुआत कर दी जाएगी।

ये MSME पार्क आपकी जिंदगी कैसे बदलेंगे?

अब सवाल यह उठता है कि आखिर ये MSME पार्क हैं क्या और इससे आम आदमी को क्या फायदा होगा?

इसे आसान भाषा में समझिए। ये सरकार की तरफ से बनाए गए ऐसे खास औद्योगिक इलाके हैं, जहां छोटे से छोटा व्यापारी या कोई भी नया उद्यमी अपना काम आसानी से शुरू कर सकता है। यहां सरकार आपको 'प्लग एंड प्ले' सुविधा देती है, यानी आपको बस अपना आइडिया और मशीनें लेकर आना है, बाकी सब कुछ तैयार मिलेगा:

अच्छी और चौड़ी सड़कें

24 घंटे बिजली की सुविधा

पानी की पूरी व्यवस्था

और भी कई बुनियादी सुविधाएं

सरकार का मकसद साफ है - अब राज्य के युवाओं को नौकरी या अपना काम शुरू करने के लिए हैदराबाद, बैंगलोर या चेन्नई जैसे बड़े शहरों की तरफ न देखना पड़े। वे अपने ही घर, अपने ही जिले में रहकर अपना बिजनेस कर सकें और दूसरे लोगों को भी रोजगार दे सकें।

सरकार का कहना है कि अब हम सिर्फ 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार करने में आसानी) की बात नहीं कर रहे, बल्कि 'स्पीड ऑफ बिजनेस एग्जीक्यूशन' (फटाफट काम शुरू करने) पर ध्यान दे रहे हैं।

यह कदम आंध्र प्रदेश के छोटे कस्बों और गांवों से होने वाले पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।