img

Up Kiran, Digital Desk: अब दौसा जिले के बुजुर्ग पेंशनधारियों को पेंशन प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों और तकनीकी समस्याओं से निपटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। केंद्र सरकार ने अपने उपक्रम कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से एक नई तकनीक पेश की है, जिससे पेंशन वितरण की प्रक्रिया में सुधार होगा। यह तकनीक अब बुजुर्गों के लिए पेंशन निकालने के तरीके को पूरी तरह से बदलने वाली है।

फिंगरप्रिंट की जगह चेहरा प्रमाणीकरण

पूर्व में पेंशनधारियों को पेंशन निकालने के लिए फिंगरप्रिंट स्कैनिंग का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन अब इस प्रक्रिया को डिजिटल इंडिया अभियान के तहत और भी सरल बना दिया गया है। पेंशनधारी अब अपनी उंगली के बजाय चेहरे के जरिए अपनी पहचान प्रमाणित कर सकेंगे। इस बदलाव से न सिर्फ पेंशनधारियों की परेशानी कम होगी बल्कि तकनीकी गड़बड़ियों का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।

ई-केवाईसी की समस्याओं का समाधान

पिछले कुछ समय से बुजुर्ग, दिव्यांग और विधवा पेंशनधारियों को ई-केवाईसी के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। बार-बार एरर मैसेज और तकनीकी खामियों के कारण कई पेंशनधारियों को ई-मित्र और जनसेवा केंद्रों पर चक्कर लगाने पड़ते थे। ऐसे में, पेंशन रोकने का डर भी बुजुर्गों के मन में था। अब इस समस्या का समाधान चेहरा पहचानने वाली प्रणाली ने किया है।

सीएससी की पहल और ग्रामीणों की मदद

दौसा जिले में लगभग 48,000 पेंशनधारी ऐसे थे जिनकी ई-केवाईसी लंबित थी और पेंशन का भुगतान प्रभावित हो रहा था। अब सीएससी के संचालक गांव-गांव जाकर पेंशनधारियों का चेहरा प्रमाणीकरण कर रहे हैं और उन्हें पेंशन उनके घर तक पहुंचा रहे हैं। यह पहल विशेष रूप से उन बुजुर्गों के लिए सहायक साबित हो रही है जिनकी उंगलियों की रेखाएं उम्र के कारण धुंधली हो चुकी हैं या जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं।

नई प्रणाली की तकनीकी खूबी क्या

ये नई प्रणाली ‘लाइव आई ब्लिंक’ सिस्टम पर आधारित है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पेंशनधारी स्वयं उपस्थित हैं। इस तकनीक से कोई भी धोखाधड़ी का जोखिम नहीं होगा। अब पेंशनधारी अपने चेहरे की पहचान के माध्यम से सीधे पेंशन प्राप्त कर सकेंगे, और इसके लिए भारी-भरकम फिंगरप्रिंट स्कैनर की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मोबाइल कैमरा ही अब इस प्रमाणीकरण के लिए पर्याप्त होगा।