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लोकसभा में मंगलवार को उस समय हंगामा मच गया जब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 का कड़ा विरोध करते हुए विधेयक की एक प्रति फाड़ दी। ओवैसी ने इस नाटकीय कदम के जरिए सरकार पर देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने और उनके अधिकारों पर हमला करने का इल्जाम लगाया। यह घटना वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और अल्पसंख्यक समुदायों पर विधेयक के प्रभाव को लेकर चल रही तीखी राजनीतिक बहस के बीच हुई।

लोकसभा में विधेयक पर बहस के दौरान ओवैसी ने महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका में भेदभावपूर्ण कानूनों के खिलाफ विद्रोह का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि गांधी जी ने श्वेत दक्षिण अफ्रीका के अन्यायपूर्ण कानूनों को खारिज करते हुए कहा था कि मेरी अंतरात्मा इसे स्वीकार नहीं करती। उन्होंने उन कागजों को फाड़ दिया था। उसी तरह मैं भी इस विधेयक को फाड़ रहा हूं, क्योंकि ये असंवैधानिक है। इसके बाद उन्होंने विधेयक की प्रति को टुकड़े-टुकड़े कर दिया, जिससे सदन में सन्नाटा छा गया और सत्ता पक्ष के सदस्यों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर धार्मिक आधार पर देश को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये विधेयक मुसलमानों की गरीबी दूर नहीं करेगा। अब अधिकारी वक्फ नियमों को तय करेंगे, जो हमारे अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने सरकार से अपने 10 प्रस्तावित संशोधनों को स्वीकार करने की मांग की, जिसे विपक्षी दलों का समर्थन भी मिला।

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