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Up Kiran, Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय चीन दौरे पर हैं, जहां उनका मुख्य कार्यक्रम शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में हिस्सा लेना है। इस अवसर पर मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा की।

शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को केवल पड़ोसी ही नहीं, बल्कि सहयोगी के रूप में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि दोनों देशों को अपने सफल प्रयासों का जश्न मिलकर मनाना चाहिए और साथ मिलकर काम करना चाहिए। उनके अनुसार, भारत और चीन की जिम्मेदारी सिर्फ अपने नागरिकों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की तरक्की में योगदान देने की भी है।

शी ने भारत और चीन को प्रतीकात्मक रूप से ‘हाथी’ और ‘ड्रैगन’ बताते हुए कहा कि ये दोनों शक्तिशाली राष्ट्र मिलकर दुनिया में स्थिरता और विकास की राह खोल सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन रिश्तों को केवल तात्कालिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सोच के साथ मजबूत करना आवश्यक है।

चीन की सरकारी मीडिया एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शी ने यह भी बताया कि भारत और चीन एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं, बल्कि अवसर हैं। उन्होंने वैश्विक बहुपक्षीय व्यवस्था का समर्थन करने और लोकतांत्रिक, संतुलित वैश्विक मंच बनाने पर जोर दिया। उन्होंने अमेरिका की नीतियों पर भी इशारा करते हुए कहा कि भारत और चीन को मिलकर काम करना चाहिए।

यह मुलाकात पिछले लगभग दस महीनों के बाद हुई है। इस समय जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और आर्थिक मसलों को लेकर तनाव बढ़ा है, ऐसे में भारत और चीन के बीच बातचीत को विशेष महत्व दिया जा रहा है। शी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य अस्थिर और जटिल है, और ऐसे समय में भारत और चीन जैसी प्राचीन सभ्यताओं का सहयोग ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के लिए भी सकारात्मक संकेत है।

इस मुलाकात से यह स्पष्ट हुआ है कि आने वाले समय में भारत और चीन वैश्विक मंच पर मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं, खासकर तब जब दुनिया में राजनीतिक स्थिरता कम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ अधिक हैं।


 

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