हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान की, जहाँ कुछ भी गलत हो तो उसका इल्जाम भारत पर डालना एक आम बात हो गई है। हाल ही में, पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि उसने उत्तरी वजीरिस्तान के झल्लार इलाके में एक बहुत बड़े आतंकी हमले को नाकाम कर दिया। इस ऑपरेशन में 25 आतंकियों को मार गिराने की बात कही गई, लेकिन साथ ही 5 पाकिस्तानी सैनिकों की जान भी चली गई।
यहाँ तक तो यह एक सामान्य ऑपरेशन की खबर लगती है, लेकिन इसके बाद पाकिस्तान ने वही किया जिसके लिए वह जाना जाता है। अपनी किसी भी नाकामी या अंदरूनी कलह को छिपाने के लिए उसने बिना किसी सबूत के इस हमले की साजिश का आरोप भारत पर मढ़ दिया। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने इसे "भारतीय प्रॉक्सी" की करतूत बताया, जो कि उनकी एक पुरानी आदत है।
सच्चाई क्या है: असली कहानी कुछ और ही है। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूच अलगाववादी संगठन जैसे स्थानीय आतंकी गुट लगातार पाकिस्तानी सेना को निशाना बना रहे हैं। इन हमलों में सैकड़ों सैनिक मारे जा चुके हैं, और सेना का मनोबल भी गिर रहा है।
सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व पर भी सवाल उठ रहे हैं। देश के अंदरूनी हालात, खासकर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में, सेना के कंट्रोल से बाहर होते जा रहे हैं। जनता में भी सेना के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। ऐसे में, जब घर में ही आग लगी हो, तो ध्यान भटकाने का सबसे आसान तरीका है भारत का नाम लेना।
यह पाकिस्तान की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। जब भी सेना पर दबाव बढ़ता है या उसकी कोई कमजोरी सामने आती है, तो वह "विदेशी ताकतों" और खासकर भारत का डर दिखाकर अपनी जनता को बहलाने की कोशिश करती है। लेकिन अब यह दांव पुराना हो चुका है और दुनिया भी उनकी इस चाल को अच्छी तरह समझती है। अपनी समस्याओं का हल निकालने के बजाय, दूसरों पर आरोप लगाना किसी भी देश को लंबे समय तक मदद नहीं कर सकता।

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