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Up Kiran, Digital Desk: पंजाब में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिससे हजारों लोगों की जिंदगी मुश्किल में पड़ गई है। बांधों से छोड़े गए पानी और लगातार हो रही बारिश की वजह से नदियां उफान पर हैं और कई किनारों को तोड़ चुकी हैं। इसका नतीजा यह है कि हजारों लोगों को अपने घरों की छतों पर रात गुजारनी पड़ रही है, और वे प्रशासन से मिलने वाली मदद का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित हैं, जिनमें गुरदासपुर, फिरोजपुर, अमृतसर और पठानकोट शामिल हैं। इन इलाकों में लोगों के घर डूब गए हैं, फसलें तबाह हो गई हैं और मवेशियों के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने मानसून से पहले कोई तैयारी नहीं की, जिसका खामियाजा आज उन्हें भुगतना पड़ रहा है।

हालात इतने गंभीर हैं कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) की कई चौकियां भी बाढ़ के पानी में बह गई हैं या क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सेना, NDRF, और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव के काम में जुटी हुई हैं। वायुसेना के हेलीकॉप्टर भी लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी सामान गिराने के मिशन पर हैं। गुरदासपुर में तो वायुसेना ने एक मुश्किल ऑपरेशन में सेना और बीएसएफ के 38 जवानों को बचाया।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सभी मंत्रियों और अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में रहने और जरूरतमंदों तक पहुंचने का निर्देश दिया है। कई विधायक और अधिकारी खुद पानी में उतरकर लोगों को ट्रैक्टरों के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं।

इस मुश्किल घड़ी में सामाजिक संस्थाएं भी आगे आई हैं। पर्यावरण प्रेमी और सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल अपनी टीम के साथ नावों में घर-घर जाकर लोगों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं और प्रशासन की मदद कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी की महिला विंग भी मेडिकल कैंप लगा रही है और महिलाओं तथा बच्चों के लिए राशन और साफ-सफाई का सामान मुहैया करा रही है।

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