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Up kiran,Digital Desk : भारत और 27 देशों के प्रमुख आर्थिक समूह यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ऐतिहासिक बताया और उद्योग जगत के लिए इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया। उनका कहना है कि यह समझौता न केवल वैश्विक बल्कि घरेलू स्तर पर भी महत्वपूर्ण होगा।

गोयल ने भरोसा जताया कि यह एफटीए दोनों पक्षों के लिए संतुलित लाभ प्रदान करेगा और भारत की निर्यात क्षमता को मजबूत करेगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर अपने निर्यात और आर्थिक साझेदारी के दायरे को बढ़ाने के प्रयास में है।

निर्यात क्षेत्रों के लिए ‘सुपर डील’

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यात क्षेत्रों के लिए ‘सुपर डील’ साबित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों को यूरोपीय बाजारों में ज्यादा पहुंच मिलेगी।

समझौते के प्रमुख बिंदु

यह एफटीए भारत और 27 देशों के व्यापारिक ब्लॉक के बीच होगा।

इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ और निर्यातकों के लिए ‘सुपर डील’ माना जा रहा है।

इसका उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में संतुलन और वृद्धि लाना है।

वाणिज्य सचिव का बयान

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि दोनों पक्ष प्रस्तावित समझौते पर बातचीत पूरी करने के बेहद करीब हैं। शेष मुद्दों को सुलझाने के लिए गहन चर्चा जारी है। इस महीने के अंत में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की भारत यात्रा के दौरान इस सौदे की औपचारिक घोषणा हो सकती है।

भारत के लिए महत्व

यह समझौता केवल शुल्क कटौती तक सीमित नहीं है। यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है। संतुलित समझौते के माध्यम से भारत न केवल अपनी सेवाओं के निर्यात को बढ़ा सकता है, बल्कि उच्च-तकनीकी निवेश भी आकर्षित कर सकता है। इसके साथ ही एमएसएमई और अन्य भारतीय उद्यमियों को यूरोपीय मानकों के अनुरूप बाजार पहुंचने का अवसर मिलेगा, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस महीने के अंत में एफटीए की घोषणा होती है, तो यह भारतीय निर्यातकों के लिए नए द्वार खोलेगा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत सुरक्षा कवच भी साबित होगा। पीयूष गोयल के “मदर ऑफ ऑल डील्स” के संबोधन ने उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के बीच उत्साह और सकारात्मक माहौल पैदा किया है।