Up kiran,Digital Desk : लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे 'लोकतंत्र और संविधान की जीत' करार दिया। प्रियंका ने मोदी सरकार को चुनौती दी है कि यदि उनकी मंशा साफ है, तो वे सोमवार को ही संसद का विशेष सत्र बुलाएं और उस पुराने विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) को पेश करें, जिसे सभी दलों का समर्थन प्राप्त था।
"संघीय ढांचे को बदलने का षड्यंत्र था नया बिल"
प्रियंका गांधी ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जो नया संशोधन लेकर आई थी, वह महिला आरक्षण की आड़ में देश के संघीय ढांचे को नष्ट करने की एक गहरी साजिश थी। उन्होंने कहा, "कल जो हुआ, वह विपक्षी एकजुटता की जीत है। मोदी सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश की थी, जिसे हमने नाकाम कर दिया। यह विधेयक महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि मनमाने तरीके से परिसीमन करने और जातिगत जनगणना से बचने के लिए लाया गया था।"
विपक्ष को 'महिला विरोधी' दिखाने का पीआर स्टंट
भाजपा द्वारा विपक्ष पर लगाए जा रहे 'महिला विरोधी' होने के आरोपों पर प्रियंका ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, "भाजपा खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती है, लेकिन उनका इतिहास हाथरस, उन्नाव और महिला पहलवानों के मामले में पूरा देश देख चुका है। सरकार का मानना था कि अगर बिल पास हुआ तो उनकी जीत, और नहीं हुआ तो विपक्ष को दोषी ठहरा देंगे। लेकिन अब जनता उनके इस 'पीआर' और 'मीडियाबाजी' को समझ चुकी है।"
परिसीमन और ओबीसी आरक्षण पर घेरा
प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे इसमें सामाजिक न्याय चाहते हैं। उन्होंने मांग की कि:
पुराना बिल लागू हो: जिस नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) को पहले ही समर्थन मिल चुका है, उसे तुरंत प्रभावी किया जाए।
ओबीसी कोटा: जैसे एससी (SC) और एसटी (ST) के लिए आरक्षण की व्यवस्था है, वैसे ही अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए भी उनकी संख्या के अनुरूप कोटा सुनिश्चित किया जाए।
साजिश का पर्दाफाश: सरकार चाहती थी कि विपक्ष इस बिल पर मुहर लगा दे ताकि उन्हें बिना जातिगत जनगणना के परिसीमन करने की 'लाइसेंस' मिल जाए।
विपक्षी एकता के लिए निर्णायक मोड़
प्रियंका ने दावा किया कि मोदी सरकार को पहली बार इतना बड़ा 'धक्का' लगा है और यह देश के लिए बहुत जरूरी था। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष एकजुट होता है, तो तानाशाह मानसिकता को हराया जा सकता है। प्रियंका के मुताबिक, गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के भाषणों से साफ था कि वे विपक्ष को डराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष पीछे नहीं हटा।
लोकसभा में क्यों गिरा विधेयक?
बता दें कि शुक्रवार को लोकसभा में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पर वोटिंग हुई थी। पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो सरकार जुटाने में विफल रही। इसके साथ ही परिसीमन और संघ राज्य विधि से जुड़े विधेयक भी लटक गए हैं।




